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मंथन

विदेशी कामगारों के लिए वेलकम सेंटर

म्यूनिख विदेशों से आने वाले हुनरमंद कर्मचारियों की राह आसान करने के लिए नई नीतियां बना रहा है. कोशिश है बवेरिया में ऐसे कदम उठाने की जिनसे विदेश से आने वाले कुशल कामगारों को काम पाने में आसानी हो.

सुआ शोऊ के इंतजार के पल जब खत्म होते हैं तो उनके पीछे इंतजार करने वाले बेसब्र हो रहे होते हैं. म्यूनिख का विदेश मामलों का कार्यालय एकदम ट्रेन स्टेशन जैसा लगता है. कई दिन विदेश विभाग में ऐसे भी होते हैं कि इंतजार करने वालों की लाइन खत्म ही नहीं होती.

सुआ शोऊ चीन की हैं और इस ऑफिस में इंतजार का उनका मौका पहला नहीं है. वह यहां जर्मनी रहने की अवधि और काम करने की अवधि बढ़ जाने की दरख्वास्त के साथ आई है. वह आगे भी म्यूनिख में काम करना चाहती हैं. 31 साल की सुआ कहती हैं, "सबसे मुश्किल था जर्मनी में काम का कॉन्ट्रेक्ट पाना."

वह एक साल से एक चीनी कंपनी के लिए जर्मनी में पेटेंट इंजीनियर का काम करती हैं, "पहली बार जब मैंने वर्क परमिट के लिए सभी दस्तावेज इकट्ठा किए. तब ही मुझे लगा था कि इसमें वक्त लगेगा. फिर आखिरकार मुझे वीजा और वर्क परमिट मिल ही गया." हालांकि वहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था. सुआ शोऊ कहती हैं कि चीन से जर्मनी में काम करने और नियमों कानूनों की जानकारी पाना आसान नहीं था.

20,000 कामगारों की कमी

सुआ शोऊ जैसे विदेशी कुशल कर्मचारियों का रास्ता आसान करने के लिए म्यूनिख जुलाई से एक केंद्रीय ऑफिस खोलना चाहता है जहां नौकरी चाहने वाले लोग और कंपनियां संपर्क कर सकते हैं. इससे विदेशी आवेदकों का इंतजार कम होगा और कागजी काम में ज्यादा वक्त जाया नहीं होगा. म्यूनिख को लगता है कि इससे वह ज्यादा विशेषज्ञों को अपने राज्य में आकर्षित कर सकेगा और वह तेजी से नौकरियां पा सकेंगे. जर्मनी में 20,000 कुशल कामगारों की कमी है. म्यूनिख विदेश कार्यालय की प्रमुख फ्रांसिस्का डोबरिष बताती हैं, "मुद्दा यह है कि जर्मनी, बवेरिया और हम लोगों को आकर्षित कर सकें."

हालांकि नौकरियों के अलावा, तनख्वाह, ऑफर तो जरूरी है लेकिन साथ ही प्रबंधन और प्रशासनिक काम भी तेजी से होना चाहिए. अक्सर तो ऐसा होता है कि कई महीने का इंतजार होता है. इस दौरान आवेदक सोचने लगता है कि क्या जर्मनी काम के लिए सच में अच्छी जगह है. सामान्य तौर पर अच्छे, योग्य कुशल कर्मचारियों या विशेषज्ञों को कई देशों से ऑफर होते हैं. डोबरिष कहती हैं कि जर्मनी प्रतियोगिता में है.

कम लालफीताशाही

विशेषज्ञ और कार्यकारी अधिकारियों का केंद्रीय संगठन, इसके लिए सबसे पहले एक छोटे नाम की जरूरत है जिसे दुनिया भर में समझा जा सके और लोगों का उसकी ओर ध्यान जाए. वेलकमसेंटर एक प्रस्तावित नाम है.

कंपनियों को भी साथ लाने की योजना है ताकि उन्हें नए कर्मचारियों का फायदा हो सके. गेरहार्ड शोल्ज इस नए सेंटर की नेतृत्व टीम में शामिल हैं. म्यूनिख ने वेलकमसेंटर के लिए नई नौकरियां घोषित की हैं. उम्मीद की जा रही है कि विदेश मामलों का ऑफिस भी विशेषज्ञों की कमी दूर करने की दिशा में काम करेगा.

आगे बवेरिया

बवेरिया के आर्थिक मामलों के मंत्री मार्टिन त्साइल वादा करते हैं कि उन्हें राज्य में काम करने के बेहतरीन मौके मिलेंगे. नए सेंटर के साथ म्यूनिख पूरे मामले में अपना सहयोग देना चाहता है. जुलाई में पहले आवेदक इस सेंटर में आवेदन कर सकेंगे.

2005 से जर्मनी में काम करने और रहने का परमिट एक दूसरे से जुड़ा हुआ है. जिसके पास रोजगार का कॉन्ट्रेक्ट है उसे उतने समय के लिए जर्मनी में रहने की अनुमति है. इसके अलावा तीन साल से कुशल कामगारों और युवा एक्सपर्ट्स के लिए ब्लू कार्ड देने की व्यवस्था की जा रही है.

सुआ शोऊ के लिए इंतजार मीठा रहा. वह म्यूनिख में जर्मन-चीनी कंपनी में आगे भी काम कर सकती हैं, "मेरे लिए यूरोप में काम करना शानदार हैं. यहां लोग बहुत दोस्ताना हैं. मुझे ऐसी संस्कृति में काम करना अच्छा लगता है, साथ ही, जो संभावनाएं यहां पढ़ाई और रोजगार से मिलती हैं."

रिपोर्ट: टिलो माह्न/एमए

संपादन: ओ सिंह

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