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विज्ञान

"विकलांगता हो सकता है मोटापा"

यूरोपीय संघ की अदालत ने फैसला सुनाया है कि मोटे लोगों को विकलांगों की श्रेणी में रखा जा सकता है. अदालत का कहना है कि किसी के साथ काम की जगह पर सिर्फ मोटापे की वजह से भेदभाव नहीं किया जा सकता.

यह सवाल तब उठा जब बच्चे की देखभाल करने वाले कार्स्टेन कालटोफ्ट का मामला डेनमार्क की एक अदालत में आया. कालटोफ्ट ने स्थानीय अधिकारियों पर उनके साथ भेदभाव का आरोप लगाया. नौकरी के दौरान उनका वजन कभी भी 160 किलो से कम नहीं रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी नौकरी उनके वजन की वजह से चली गई. उनका मानना है कि उनके साथ भेदभाव किया गया. डैनिश अदालत ने इस बारे में यूरोपीय संघ की अदालत से मामला साफ करने की दरख्वास्त की.

लक्जमबर्ग स्थित यूरोप की सबसे बड़ी कोर्ट से पूछा गया कि क्या यूरोपीय संघ का कानून मोटापे के कारण भेदभाव पर पाबंदी लगाता है? या क्या मोटापे को विकलांगता की श्रेणी में रखा जाना चाहिए? यूरोपीय कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रोजगार कानून में मोटापे के कारण भेदभाव पर साफ तौर पर रोक नहीं लगाई गई है और ऐसे मामलों को बचाने के लिए कानून में तोड़ मरोड़ ठीक नहीं है.

हालांकि कोर्ट ने कहा "समानता के आधार पर पेशेवर जीवन में अगर कर्मचारी को मोटापे के कारण अपना भरपूर और प्रभावशाली योगदान देने में अन्य कर्मचारियों के मुकाबले दिक्कत आती है" तो इसे विकलांगता माना जा सकता है. इस तरह यह भेदभाव के खिलाफ वाले विधेयक के तहत आ जाएगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2008 के आंकड़ों के मुताबिक यूरोप में रहने वाली 23 फीसदी महिलाएं और 20 फीसदी पुरुष मोटापे के शिकार हैं.

एसएफ/एजेए (रॉयटर्स)

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