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दुनिया

वार्ता रद्द लेकिन हुर्रियत से मुलाकातें जारी

भारत ने पाकिस्तान के साथ प्रस्तावित सचिव स्तर की द्विपक्षीय बातचीत को रद्द कर दिया है. फैसला पाकिस्तानी उच्चायुक्त की हुर्रियत नेता शब्बीर शाह से मुलाकात के बाद लिया गया लेकिन और नेताओं से मुलाकातें जारी हैं.

प्रधानमंत्री पद संभालते समय मोदी ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को न सिर्फ दावत दी बल्कि वापसी में उनकी मां के लिए तोहफा भी भेजा. संबंधों में ऐसी मिठास से दोनों देशों के बीच बातचीत के नए सिलसिले की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन मोदी सरकार का ताजा फैसला उसके विपरीत नजर आ रहा है. खासकर उस समय जब खुद नवाज शरीफ की सरकार पाकिस्तान में मुश्किल दौर से गुजर रही है.

दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच 25 अगस्त को बातचीत होनी थी लेकिन उसे कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात के बाद रद्द कर दिया गया. भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त की कश्मीरी नेताओं के साथ मुलाकातों को अस्वीकार्य बताया. हालांकि अलगाववादी नेताओं का पाकिस्तानी उच्चायुक्त से मिलने का सिलसिला जारी है. इस हफ्ते वह दूसरे अलगाववादी नेताओं से मिल रहे हैं.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत की जो कोशिशें शुरू की थीं उनपर पाकिस्तानी उच्चायुक्त और कश्मीरी अलगाववादी नेताओं ने पानी फेर दिया. पाकिस्तान ने कहा है कि बातचीत का रद्द किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.

हाल में भारत और पाकिस्तान ने एक दूसरे पर नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम तोड़ने संबंधी कई आरोप लगाए. कश्मीर यात्रा के दौरान कारगिल पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को छद्म युद्ध के लिए भी जिम्मेदार ठहराया. इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर हालात बेहतर करने की दिशा में सकारात्मक रवैया न अपनाने का आरोप लगाया. भारत के इस फैसले के पीछे सरकार पर आरएसएस के भारी दबाव के कयास भी लगाए जा रहे हैं.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत से बातचीत से पहले अलगाववादी नेताओं के साथ बातचीत कोई नई बात नहीं. इसका मकसद ही यही है कि सार्थक चर्चा हो सके. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, "भारत के फैसले से भारत के साथ संबंध दोस्ताना बनाने की हमारे नेताओं की कोशिशों को धक्का लगा है." भारत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खुद घरेलू स्तर पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों से घिरे हुए हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में खटास 2008 में हुए मुंबई हमले के बाद से और बढ़ गई. लेकिन मोदी के शपथग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को बुलाए जाने से उम्मीद की जा रही थी कि कश्मीर मुद्दे और दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों के लिए रास्ते खुलेंगे. पिछले महीले दोनों देशों के बीच 25 अगस्त को बातचीत होना तय किया गया था, जिसे काफी उम्मीद भरी नजरों से देखा जा रहा था.

रिपोर्ट: समरा फातिमा (डीपीए/एएफपी)

संपादन: महेश झा

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