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विज्ञान

वाई फाई से हैकिंग का खतरा

स्मार्टफोन पर आमतौर पर जिस समय लोग वाई फाई का इस्तेमाल नहीं कर रहे होते तो भी वाई फाई ऑन ही रखते हैं. इससे हैकर्स को सिस्टम में ताक झांक करने का न्यौता मिल सकता है.

जर्मनी में उपभोक्ताओं के लिए उत्पादों से संबंधित रेटिंग और अन्य आवश्यक जानकारी जारी करने वाली एजेंसी टीयूवी के मुताबिक अगर वाई फाई और ब्लूटूथ का इस्तेमाल नहीं हो तो इन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए. वाई फाई चालू रहने से आपका फोन या लैपटॉप किसी भी पासवर्ड मुक्त कनेक्शन से खुद ही कनेक्ट हो सकता है.

इस दौरान अगर उपभोक्ता किसी ईमेल ऐप का इस्तेमाल करता है और यूजरनेम और पासवर्ड जैसी अहम जानकारियां डालता है, ऐसी स्थिति में हैकरों के लिए हमला करना आसान हो जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक हैकर सीधे तौर पर ईमेल की जानकारी तो हासिल नहीं कर सकते लेकिन 'फॉरगॉटेन पासवर्ड' यानि पासवर्ड भूल जाने की स्थिति में इस्तेमाल होने वाले विकल्प के जरिए ईमेल तक पहुंच सकते हैं.

बैटरी की बचत

इस्तेमाल न होने पर वाई फाई और ब्लूटूथ को बंद रखने से बैटरी की खपत भी कम होती है. अगर नोटबुक या मोबाइल फोन की बैटरी जल्दी साथ छोड़ने लगे तो उसे साथ में रखना बेकार होता जाता है. बैटरी देर तक चलाने के लिए कुछ खास बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है. नोटबुक में सही प्रोग्राम का चयन इनमें से एक है.

इस्तेमाल न होने पर उपकरण को स्लीप मोड पर डाल देना फायदेमंद साबित होता है. जर्मन कंप्यूटर पत्रिका पीसी वेल्ट के मुताबिक विडोज का कंट्रोल पैनेल एनर्जी बचाने के कई विकल्प देता है. इनमें सबसे काम का है 'बैलेंस्ड' प्रोग्राम. काम के बीच में जब भी कभी खाली समय हो, जब आपको उपकरण का इस्तेमाल न करना हो तो इसे स्लीप मोड पर डाल देना चाहिए. कंप्यूटर को बंद करके नए सिरे से दोबारा चालू करने पर ज्यादा ऊर्जा की खपत होती है जबकि स्लीप मोड से दोबारा चालू होने में कंप्यूटर कम ऊर्जा का इस्तेमाल करता है.

एसएफ/एमजे (डीपीए)

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