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खेल

वर्ल्ड कप में कौन किससे भिड़ेगा?

वो आठ ग्रुप कौन होंगे, किस ग्रुप के मुकाबले आसान होंगे. अर्जेंटीना, जर्मनी और ब्राजील जैसी मजबूत टीमें कहां टिकेंगी और कौन होगा ग्रुप ऑफ डेथ. इन सवालों के जवाब आज मिलने वाले हैं, जब ब्राजील विश्व कप के ड्रॉ का एलान होगा.

गुनगुनी धूप और समंदर का किनारा. अंडों से कछुओं के नवजात बच्चे निकले हैं. समंदर के पानी से गीली रेत में धूप का मजा ले रहे हैं. कोस्टा डो सोएपे का मौसम बहुत सुहाना है और इसे कुछ घंटों का इंतजार है.

फीफा ने मुकाबलों का एलान करने के लिए ब्राजीली शहर सल्वाडोर के पास इसी जगह को चुना है. सल्वाडोर से यहां कार में घंटे भर की यात्रा के बाद पहुंचा जा सकता है. सल्वाडोर कभी ब्राजील की राजधानी थी और इसकी संस्कृति की बड़ी पहचान है. यहां का खाना भी बहुत प्रसिद्ध है. हालांकि जून में जब कंफेडरेशन कप हुआ, तो इसकी पहचान सरकार के खिलाफ गुस्सा निकालने वाले नाराज ब्राजीलियाई नागरिकों से हुई.

प्रदर्शन भी साथ

विश्व कप में कौन सी टीमें किस ग्रुप में होंगी, इसका एलान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ यानी फीफा ने पूरी तैयारी कर ली है. लेकिन साथ ही प्रदर्शनकारियों की भी पूरी तैयारियां हैं. वे भी इस दिन अपनी बात रखने की कोशिश करेंगे. उन्होंने एलान किया है कि वे सिर्फ ब्राजील सरकार के भ्रष्टाचार का ही विरोध नहीं करने वाले हैं, बल्कि विश्व कप आयोजित करने में लगी भारी राशि का भी विरोध करेंगे. 'एनोनिमसब्राजील' नाम के संगठन ने कहा है, "अगर आप सरकार के भ्रष्टाचार के साथ नहीं हैं, तो छह को सल्वाडोर में सड़कों पर उतरिये."

फीफा की कोशिश है कि आठ ग्रुपों को इस तरह बांटा जाए कि हर ग्रुप में अलग अलग महाद्वीप की टीमों को जगह मिले. लेकिन ये काम इतना आसान नहीं है. खास तौर पर यूरोप की वजह से, जहां की 13 टीमें विश्व कप में शामिल होती हैं. लिहाजा कुछ ग्रुपों में एक से ज्यादा यूरोपीय टीमें होंगी.

Infografik BigPicture Participants of the 2014 World Cup in Brazil BRA

ब्राजील में वर्ल्ड कप खेलने वाले देश

यूरोपीय टीमों से मुश्किल

ड्रॉ में इस बात का ख्याल रखा गया है कि गैर वरीयता वाली यूरोपीय टीम को ऐसे पॉट में रखा जाए, ताकि उसे दूसरे यूरोपीय देशों के ग्रुप में न शामिल होना पड़े. इस बात का भी ख्याल रखा जा रहा है कि भले ही दो यूरोपीय टीमें एक ग्रुप में आ जाएं, लेकिन तीन यूरोपीय टीमें किसी ग्रुप में न फंसें. फीफा के महासचिव जेरोमे वाल्के ने कहा, "इसे समझना आसान नहीं है. पहली बार में मैं भी चकरा गया था."

इंग्लैंड के कोच रॉय हॉजसन का कहना है कि उनके लिए चिर प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि भौगोलिक लिहाज से कोई टीम आसान या मुश्किल है. विशाल भूक्षेत्र वाले देश ब्राजील में टीमों को अलग अलग मैचों के लिए हजारों किलोमीटर का सफर तय करना होगा.

सबसे बुरा हाल ब्राजील वाले ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहने वाली टीम का होगा. उसे पहले ही मैच में 12 जून को पांच बार के चैंपियन ब्राजील से साओ पाओलो में भिड़ना होगा, जिसके बाद अगले मैच के लिए 3,000 किलोमीटर दूर अमाजोनिया की उड़ान भरनी होगी. तीसरे मैच के लिए उन्हें फिर पूर्वोत्तर का सफर तय करना होगा.

मौसम का क्या करें

कुछ टीमों ने ब्राजील में मौसम का भी हवाला दिया है. इटली की मांग है कि दोनों हाफ में टीमों को दो दो मिनट का ब्रेक दिया जाए, ताकि खिलाड़ी शरीर में पानी की कमी के शिकार न हो जाएं. वैसे फिलहाल कुछ घंटों बाद ड्रॉ का एलान होने वाला है, जब वाल्के के साथ स्टेज पर आठ पूर्व खिलाड़ी भी होंगे. इनमें 86 साल के अलसीडेस घिग्गिया भी हैं. उन्होंने ब्राजील के खिलाफ 1950 के फाइनल में गोल करके उरुग्वे को विश्व कप जिताया था. ब्राजील में पिछला वर्ल्ड कप 1950 में ही हुआ था.

वैसे विवाद का एक मुद्दा इस शो को प्रेजेंट करने वाले टीवी मेजबानों को लेकर भी है. फीफा ने तय किया है कि वह फर्नांडा लीमा और उनके पति रोड्रिगो हिलबर्ट को इसकी जिम्मेदारी देंगे, जो साफ रंग वाले हैं. जबकि पहले यह काम अश्वेत प्रेजेंटरों कमीला पिटागाना और लजारो रामोस को दिया गया था. फीफा ने इसमें किसी तरह के विवाद को खारिज कर दिया है. उसका कहना है कि ब्राजील बहुसांस्कृतिक देश है.

एजेए/ओएसजे (एएफपी)

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