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खेल

वर्ल्ड कप के लिए नमूने लेने में जुटा फीफा

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ दुनिया भर के शीर्ष खिलाड़ियों के खून और मूत्र के नमूने अभी से जमा करने लगा है जिससे कि खिलाड़ियों पर अगले साल वर्ल्ड कप के लिए निगरानी रखी जा सके.

खिलाड़ियों के नमूने लेने के लिए फीफा की डोपिंग निरोधी टीम बिना बताए ही फुटबॉल क्लबों में पहुंच जा रही है. पिछले हफ्ते यह टीम जर्मन फुटबॉल क्लब बायर्न म्यूनिख के ट्रेनिंग ग्राउंड आई. फीफा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डीरी द्वोराक ने गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में डोपिंग पर चल रहे विश्व सम्मेलन में इसके बारे में जानकारी दी. द्वोराक ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "दो घंटे में हमारे पास सभी खिलाड़ियों के खून और मूत्र के नमूने जमा हो गए."

द्वोराक ने बताया कि फीफा नमूने जमा करने के अपने "प्लान बी" पर काम कर रही है. नमूनों को सीधे स्विट्जरलैंड की लैब में भेजा जाएगा क्योंकि वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी वाडा की मान्यता वाला कोई लैब ब्राजील में टूर्नामेंट के दौरान उपलब्ध नहीं हो सकेगा. द्वोराक ने कहा कि फीफा ने ब्राजील के स्टेडियमों में खिलाड़ियों के नमूने लेने के बाद 12-24 घंटे के भीतर उन्हें स्विट्जरलैंड के लुजाने तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है.

जैविक पासपोर्ट

ब्राजील में हो रहे 2014 के फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान पहली बार फीफा खिलाड़ियों के जैविक पासपोर्ट का इस्तेमाल करेगी. इसके जरिए खिलाड़ियों के खून में किसी अवैध चीज की मौजूदगी का तुरंत पता चल जाएगा. फीफा ने पहली बार खिलाड़ियों के मूत्र के नमूने लेकर प्रोफाइल बनाने की नई तकनीक के इस्तेमाल की भी तैयारी की है, जिसके जरिए स्टेरॉयड का पता लगाया जा सकेगा. वर्ल्ड के लिए खिलाड़ियों के नए प्रोफाइल बनाने पर फीफा 10 लाख डॉलर खर्च करने जा रहा है. द्वोराक ने यह नहीं बताया कि इसमें कितना पैसा खिलाड़ियों के नमूनों को ब्राजील से स्विट्जरलैंड पहुंचाने में खर्च होगा.

Doping Urinproben

डोपिंग रोकने की कवायद

पिछले कुछ सालों में खिलाड़ियों के स्टेरॉयड लेने के कई मामलों के सामने आने के बाद स्टेरॉयड का पता लगाने वाली नई प्रक्रिया को वर्ल्ड कप में लागू करने की पहल की गई है. इस साल जून में महिलाओं के वर्ल्ड कप में सबसे बुरा मामला सामने आया जब उत्तर कोरिया की टीम स्टेरॉयड के इस्तेमाल की दोषी ठहराए जाने के बाद बाहर कर दी गई और पांच खिलाड़ियों पर 14-18 महीने का प्रतिबंध लगा दिया गया. हालांकि फीफा ने डोपिंग के विवादों से वर्ल्ड कप को आम तौर पर दूर ही रखा है. लेकिन 2014 वर्ल्ड कप के क्वालिफाइंग मुकाबलों के दौरान कम से कम चार खिलाड़ी ड्रग टेस्ट में फेल हुए हैं और ताहिती का एक खिलाड़ी ब्राजील में कंफेडरेशन कप के दौरान प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल का दोषी पाया गया है.

बिना बताए टेस्ट

द्वोराक ने बताया कि बायर्न म्यूनिख की टीम में बिना बताए जाना फीफा के खिलाड़ियों का प्रोफाइल बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है. अंतरराष्ट्रीय संगठन ने दुनिया के 600-700 शीर्ष खिलाड़ियों के ब्लड प्रोफाइल बनाया है. द्वोराक ने बताया, "पिछले हफ्ते हम बायर्न म्यूनिख टीम की जांच कर रहे थे. हम सुबह की ट्रेनिंग के दौरान बिना बताए पहुंचे. सारे खिलाड़ी वहीं थे, यहां तक कि जख्मी खिलाड़ी भी. यह बहुत अच्छा रहा. हमें मेडिकल टीम और टीम के मैनेजर से इसकी अनुमति मिल गई थी."

द्वोराक ने बताया कि बार्सिलोना, चेल्सी, उरुग्वे के मोनेटेरे और ब्राजील के सांतोस क्लबों की भी प्रोफाइल बनाई जा चुकी है. इसकी शुरुआत लियोनेल मेसी और नेमार जैसे स्टार खिलाडियों से की गई. वर्ल्ड कप से पहले डोपिंग के खिलाफ नियंत्रण मजबूत करने के लिए. फीफा यह तय करने में जुटा है कि टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करने वाले हर देश के सभी खिलाड़ियों के खून और मूत्र की प्रोफाइल तैयार कर ली जाए. अगले साल जून में होने वाले टूर्नामेंट के लिए अब छह महीने से भी कम समय बचा है. खिलाड़ी जब ब्राजील पहुंचेंगे तब उनके नए नमूने लेकर पुराने प्रोफाइल से मैच करा ली जाएगी.

एनआर/एजेए (एपी)

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