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दुनिया

'वर्जिन' हुईं तो पढ़ सकेंगी आगे

गरीब माता पिता की संतान थूबेलीले ड्लोडलो दक्षिण अफ्रीका में विश्वविद्यालय की पढ़ाई हासिल नहीं कर सकती थीं, उनके कौमार्य ने उन्हें आगे पढ़ने का अवसर दिया. अधिकारियों की दलील है इससे गर्भधारण और एचआईवी से बचाव होगा.

शर्त अजीब सी लगती है. प्रिटोरिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए नगरपालिका की तरफ से उन लड़कियों की स्नातक पूरा होने तक की फीस इसी शर्त पर भरी जाती है कि वे 'वर्जिन' हों. डरबन के उत्तर में 200 किलोमीटर दूर स्थित उथुकेला जिले में किशोर लड़कियों को कम उम्र में गर्भधारण और एचआईवी से दूर रखने के लिए यह प्रावधान रखा गया है.

हरे पीले रंग की मिनी स्कर्ट और गले में बीड्स का हार पहने ड्लोडलो कहती हैं, "यह छात्रवृत्ति बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मेरे भविष्य को बदल देगी. मैं दुनिया पर विजय हासिल कर सकती हूं." छात्रवृत्ति की अलग अलग रकम की व्यवस्था है, लेकिन यह सालाना हजारों डॉलर तक हो सकती है. ऐसी ही छात्रवृत्ति पाने वाली बोंगीवे सिथोल की पढ़ाई भी गरीबी के कारण रुक सकती थी, लेकिव वह इस समय यूनिवर्सिटी की छात्रा हैं.

बोंगीवे सिथोल 32 साल की हैं, लेकिन उन्होंने खुद को यौन संबंधों से दूर रखा है. सिथोल के मुताबिक उनके जैसी लड़कियों की पढ़ाई के लिए सहायता की कमी नहीं. वह कहती हैं, "हमें छात्रवृत्ति मिलेगी ही, भले हम श्रेष्ठ अंक हासिल करें या नहीं." वह कहती हैं, "आप अपने शरीर से, अपने कौमार्य से, छात्रवृत्ति हासिल कर सकते हैं." चार साल के टीचिंग डिप्लोमा कोर्स के मध्य तक पहुंच चुकी सिथोल छात्रवृत्ति पाने वाली अन्य लड़कियों में सबसे बड़ी हैं. हालांकि इसके लिए उन्हें वर्जिनिटी टेस्ट से गुजरना पड़ता है, जिसे उम्र दराज महिलाएं अंजाम देती हैं.

मानव अधिकार संगठन कौमार्य परीक्षण का विरोध कर रहे हैं. लेकिन उथुकेला के अधिकारियों को इसकी परवाह नहीं. मेयर माजीबूको ने एएफपी को बताया, "छात्रवृत्ति शुरू करने का मुख्य कारण यह है कि हमारे जिले में किशोरावस्था में गर्भधारण की घटनाओं की दर ऊंची है, और बहुत सारे युवा एचआईवी और एड्स से संक्रमित हैं." नगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 15 से 49 वर्ष आयु के बीच की आधी आबादी एचआईवी और एड्स से संक्रमित है. दक्षिण अफ्रीका में कम उम्र में बच्चे पैदा करने वाली किशोरियों की संख्या बड़ी है. अफ्रीका चेक नाम की संस्था के मुताबिक 19 साल की उम्र तक 25 फीसदी लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं. यह संस्था दिए गए आंकड़ों की जांच करती है.

माजीबूको के मुताबिक, "उन लड़कियों को ढूंढ निकालना जो खुद को इससे बचा सकती हैं, यह हमारे लिए प्रोत्साहन की बात है. और हमें यह ठीक लगा कि हम उन्हें छात्रवृत्ति देकर प्रोत्साहित करें." उन्होंने बताया कि यह आयडिया असल में छात्राओं की शिकायत से ही आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मां बन रही लड़कियों को तो बच्चों के लिए सहायता मिल जाती है लेकिन उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिलती. लिंग भेद एवं महिलाओं के अधिकारों के हनन का विरोध करने वाली संस्थाएं इस छात्रवृत्ति योजना के खिलाफ हैं. लिंग समानता आयोग की प्रमुख फानोजेल्वे शोजी के मुताबिक यह योजना भेदभाव पूर्ण है. उनके मुताबिक यह संविधान के खिलाफ है क्योंकि यह इस शर्त के साथ है कि लड़कियों को वर्जिन होना चाहिए.

एसएफ/एमजे (एएफपी)

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