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ताना बाना

वर्चुअल सिटी प्लान

मंथन के इस अंक में बात होगी ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम की जो डिजिटल सिटी प्लानिंग के जरिए विवादों को हल कर सकता है.

जर्मनी के डार्मश्टाट शहर में स्थित ग्राफिक डाटा प्रोसेसिंग इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं जिससे सिटी और लैंडस्केप प्लानिंग लोगों के लिए आसान बनाई जा सकेगी. वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक नया कंप्यूटर प्रोग्राम बनाया है जो शहर के हिस्सों को हू बहू 3डी में दिखाता है. इसे बनाने का मकसद प्रोजेक्ट के दौरान होने वाले विरोध और बहस को खत्म करना है. क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि किसी प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों को नाराजगी होती है और इसके चलते प्रोजेक्ट लटक जाता है. प्रोजेक्ट के लटकने से लाखों रुपये का नुकसान होता है. इस प्रोग्राम के तहत प्रोजेक्ट को 3डी के जरिए दिखाया जा सकता है और विरोध कर रहे लोगों को संतुष्ट किया जा सकता है या फिर उसमें बदलाव किया जा सकता है. मंथन में इस प्रोग्राम के बारे में विस्तार से बात होगी.

कमाल का ट्रांसपोर्ट रोबोट

जर्मन कंपनी नेयोबॉटिक्स ने ऐसा ट्रांसपोर्ट रोबोट तैयार किया है जो किसी भी दिशा में चल और मुड़ सकता है. ट्रांसपोर्ट रोबोट के टायर को कंपनी के ही इंजीनियरों ने तैयार किया है. कंपनी सॉफ्टवेयर से लेकर मशीन तक खुद तैयार करती है. कंपनी को एक नया रोबोट बनाने में तीन महीने लगते हैं. कंपनी ग्राहकों की मांग के हिसाब से रोबोट में बदलाव भी कर सकती है. नेयोबॉटिक्स है तो छोटी कंपनी लेकिन इसके रोबोट ऑउडी जैसी बड़ी कंपनी में भी काम करते हैं. मंथन में जानिए आखिर क्या वजह है कि छोटी कंपनी होने के बावजूद नेयोबॉटिक्स सफलता की सीढ़ी चढ़ती जा रही है.

एक लीटर में 3,500 कि.मी.

जर्मन शहर ट्रियर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हार्टमुट सॉप्के ने एक ऐसी कार बनाई है जो एक लीटर में 3,500 किलोमीटर चलती है. अब वे चार लोगों वाली कार बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका ताजा प्रोजेक्ट रोजमर्रा में काम आने वाली कार है जो एक लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर की दूरी तय कर ले. अब तक इस तरह की कारें सिर्फ प्रोटोटाइप में हैं. प्रोफेसर हार्टमुट सॉप्के इसे सड़क पर उतारना चाहते हैं. प्रोफेसर का मानना है कि कार में सिर्फ जरूरी चीजें होनी चाहिए जिससे वह चल सकें. मंथन में जानिए प्रोफेसर की चार सीटों वाली कार की खूबियां और भविष्य के यातायात के बारे में उनकी राय.

टिकाऊ स्टेडियम

विश्वकप के स्टेडियम तैयार करने को लेकर ब्राजील की कड़ी आलोचना हुई लेकिन उसने सफल आयोजन कर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया. ब्राजील का नेशनल स्टेडियम एक मिसाल पेश करता है. पहले तो नेशनल स्टेडियम को तोड़ा गया और इससे निकला 750 टन मलबा दोबारा इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा स्टेडियम की छत पर लगा फाइबरग्लास तकनीक समेत कई ऐसी चीजें हैं जो इस स्टेडियम को औरों से बहुत अलग करती है. स्टेडियम का प्रबंधन करने वालों को अब लीड प्लैटिनम सर्टिफिकेट पाने की उम्मीद है. प्लैटिनम सर्टिफिकेट लीडरशिप इन एनर्जी एंड एनवायरमेंट डिजायन वाली लीड का सर्वोच्च प्रमाण पत्र है. ये इमारतों के टिकाऊपन को मापता है. फिलहाल दुनिया का कोई ऐसा स्टेडियम नहीं है जिसके पास यह सर्टिफिकेट हो. नेशनल स्टेडियम में और क्या खास बात है, यह जानिए मंथन में शनिवार सुबह 10.30 बजे डीडी नेशनल पर.

एए/आईबी