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मंथन

वरदान बने फोरामिनिफेरा

अक्सर समंदर में पाए जाने वाले ये जीव एक कोशिका वाले होते हैं. खास बात है कि ये कैल्शियम कार्बोनेट खूब पैदा कर सकते हैं. मूंगे की चट्टानों को बचाने में लगे वैज्ञानिकों के लिए फोरामिनिफेरा एक वरदान बन कर आए हैं.

एक कोशिका वाले फोरामिनिफेरा जीव गर्म पानी में खूब पनपते हैं और हर साल एक वर्गमीटर जितनी जगह में दो किलो कैलशियम कार्बोनेट यानी चूना पैदा कर सकते हैं. मूंगे की चट्टान के मुकाबले यह मात्रा आधी है लेकिन ये जीव अम्लीकरण का सामना ज्यादा अच्छे से कर सकते हैं.

एककोशिकीय जीव फोरामिनिफेरा एक अरब साल से पृथ्वी पर हैं. देखने में यह रेत के दाने जैसे होते हैं और समुद्रतल में रहते हैं. कुछ पांच मिलीमीटर के होते हैं और कुछ 20 सेंटीमीटर लंबी धारियों में पाए जाते हैं. इनके फायदे काफी हैं. इनके जरिए पत्थरों की सटीक उम्र का पता लगाया जा सकता है और सेडीमेंटरी परतों की उम्र का भी. यानि कौन सा पत्थर कितने साल से बन रहा है, इसकी जानकारी मिल सकती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे द्वीपों के कटाव को रोका जा सकेगा. इसका कारण यह है कि फोरामिनिफेरा द्वीप के चारों ओर रहते हैं और कार्बोनेट के जरिए द्वीप को और मजबूत बनाते हैं.

गर्मी जैसे जैसे बढ़ेगी और तापमान ज्यादा होगा, उसके अनुकूल फोरामिनिफेरा की तादाद भी द्वीप के चारों तरफ बढ़ेगी. बॉन यूनिवर्सिटी में जीवाश्म विज्ञानी मार्टिन लांगेर बताते हैं, "गीजा के पिरामिड भी अवसादी यानी सेडिमेंटरी परतों से बने हैं. अगर आप कार्बोनेट के इस जमाव को ध्यान से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि यह पत्थर भी फोरामिनिफेरा से ही बने हैं. खास बात है कि जब रोमन सैनिकों को मिस्र में चूने के पत्थर मिले तो उन्हें लगा कि ये गीजा के पिरामिड बनाने वाले गुलामों के खाने के अवशेष हैं."

हालांकि एक समस्या यह भी है कि फोरामिनिफेरा किसी भी जगह की जैव विविधता को 10 से 30 प्रतिशत कम कर देते हैं. जहां जहां समुद्र का तापमान बढ़ेगा वहां वहां ये सूक्ष्म जीव पहुंच जाएंगें. वैज्ञानिकों के सामने चुनौती यह है कि कैसे फोरामिनेफोरा का बेहतरीन इस्तेमाल किया जाए.

एएम/एजेए

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