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दुनिया

"वन बेल्ट, वन रोड" प्रोजेक्ट में नेपाल भी शामिल

भारत का पड़ोसी देश नेपाल, चीन के "वन बेल्ट, वन रोड" प्रोजेक्ट में शामिल हुआ. बीजिंग की यह सड़क भारत के सारे पड़ोसी देशों तक जाएगी.

बीजिंग में दो दिन के क्षेत्रीय सम्मेलन से पहले नेपाल इस प्रोजेक्ट में शामिल हुआ है. काठमांडू में नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी और नेपाल में चीन के राजदूत यू होंग ने 'वन बेल्ट, वन रोड' समझौते पर हस्ताक्षर किये.

समझौते के तहत दोनों देश आर्थिक, पर्यावरण और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "इसके तहत संपर्क के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा. ट्रांजिट, लॉजिस्टिक सिस्टम, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और रेलवे, रोड और हवाई सेवाओं के क्षेत्र में भी आधारभूत संरचना का विकास किया जाएगा." चीन पावर ग्रिड बनाने और इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन सेवाओं को बेहतर करने में भी नेपाल की मदद करेगा.

चीन के वन बेल्ट, वन रोड प्रोजेक्ट को न्यू सिल्क रूट भी कहा जा रहा है. इसके तहत बीजिंग एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देशों को सड़क, रेल और बंदरगाहों के जरिये जोड़ना चाहता है.

नेपाल, बांग्लादेश के बाद चीन की इस परियोजना में शामिल होने वाला दक्षिण एशिया का दूसरा देश बना है. बांग्लादेश ने अक्टूबर 2016 में इस प्रोजेक्ट में शामिल होने का एलान किया था. माना जा रहा है कि बीजिंग में होने वाले क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान श्रीलंका भी वन बेल्ट, वन रोड प्रोजेक्ट से जुड़ सकता है.

दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती सक्रियता से भारत परेशान हो रहा है. पाकिस्तान को छोड़कर पारंपरिक रूप से दक्षिण एशिया के छोटे देश अब तक काफी हद तक भारत पर निर्भर रहते थे. बीच बीच में यह देश भारत पर दखल देने का आरोप भी लगाते रहे हैं. बांग्लादेश में जमात ए इस्लामी के सत्ता में आने पर भारत और बांग्लादेश के संबंध गड़बड़ा जाते हैं. वहीं श्रीलंका में लिट्टे की वजह से नई दिल्ली और कोलंबों के संबंध हिचकोले खा चुके हैं. नेपाल का मधेसी आंदोलन समय समय पर भारत की काठमांडू से दूरी बढ़ा देता है.

(सबसे बड़े इनवेस्टमंड फंड वाले देश)

ओएसजे/आरपी (डीपीए)

 

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