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दुनिया

"वन बेल्ट, वन रोड" पर भारत को अमेरिका का साथ

अमेरिकी प्रशासन ने चीन-पाकिस्तान के इकनॉमिक कॉरिडोर और वन बेल्ट, वन रोड पर भारत के विरोध का समर्थन किया है. अमेरिका का कहना है कि यह विवादित क्षेत्र से होकर गुजरता है.

अमेरिका का कहना है कि चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर एक विवादित क्षेत्र से होकर गुजरता है और किसी भी देश को वन बेल्ट वन रोड की पहल में तानाशाह की भूमिका नहीं निभानी चाहिए.

900 अरब डॉलर की यह परियोजना चीन ने मई 2016 में शुरू की थी. भारत ने तब भी इसका विरोध किया था. यह परियोजना पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से होकर गुजरती है.

अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति को संबोधित करते हुये अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा, "वन बेल्ट वन रोड विवादित क्षेत्र से होकर गुजरता है और यह अपने आप में दिखाता है कि यह एक तरह की तानाशाही है." मैटिस, सीनेटर चार्ल्स पीटर के वन बेल्ट वन रोड को लेकर पूछे गये सवाल का जवाब दे रहे थे. 

क्या है वन बेल्ट, वन रोड परियोजना?

जून 2016 में इस प्रोजेक्ट पर चीन, मंगोलिया और रूस ने हस्ताक्षर किये. जिनइंग से शुरू होने वाला यह हाइवे मध्य पूर्वी मंगोलिया को पार करता हुआ मध्य रूस पहुंचेगा. इस योजना के तहत चीन यूरोप से रेल के जरिये जुड़ चुका है. लेकिन सड़क मार्ग की संभावनाएं भी बेहतर की जाएंगी. 10,000 किलोमीटर से लंबा रास्ता कजाखस्तान और रूस से होता हुआ यूरोप तक पहुंचेगा. 56 अरब डॉलर वाला यह प्रोजेक्ट चीन के पश्चिमी शिनजियांग प्रांत को कश्मीर और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ेगा.

सदियों पुराने असली सिल्क रूट वाले इस रास्ते को अब रेल और सड़क मार्ग में तब्दील करने की योजना है. कॉरिडोर कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान, ईरान, सऊदी अरब और तुर्की को जो़ड़ेगा. 

परियोजना का मकसद

वन बेल्ट, वन रूट जैसी योजनाओं की बदौलत चीन करीब 60 देशों तक सीधी पहुंच बनाना चाहता है. परियोजना के तहत पुल, सुरंग और आधारभूत ढांचे पर तेजी से काम किया जा रहा है. निर्यात पर निर्भर चीन को नए बाजार चाहिए. बीजिंग को लगता है कि ये सड़कें उसकी अर्थव्यवस्था के लिए जीवनधारा बनेंगी.

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