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विज्ञान

वजन की चिंता खाए जा रही है

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अच्छी खबर यह है कि स्कूली छात्रों में सिगरेट पीने की प्रवृत्ति घट रही है, लेकिन चिंताजनक बात यह कि बड़ी संख्या में किशोरियां खुद को जरूरत से ज्यादा मोटा समझ रही हैं.

यूरोप और उत्तरी अमेरिका के करीब 2.5 लाख बच्चों पर किए गए सर्वे में पाया गया कि स्कूली बच्चों में पहले के मुकाबले शराब और सिगरेट पीने में कमी आई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक उन्होंने 42 देशों के स्कूलों में इस सर्वे को 2013-14 में अंजाम दिया. लेकिन साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि किशोरियों में पतला दिखने की चाह किसी बीमारी की तरह फैल रही है. अपने वजन की चिंता में परेशान रहने वाली लड़िकयों की संख्या बढ़ी है.

सर्वे में पाया गया, हालांकि लड़कों में मोटापे की दर ज्यादा तेजी से बढ़ रही है लेकिन मोटापे की चिंता की चपेट में ज्यादा लड़कियां हैं. रिपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय समंवयक जो इंचली के मुताबिक 11 साल की उम्र में खुद को मोटा समझने वाली 26 फीसदी लड़कियां हैं जबकि 15 साल की उम्र में ऐसा 43 फीसदी लड़कियां सोच रही हैं. 15 साल की एक चौथाई लड़कियां डायटिंग या वजन घटाने के अन्य नुस्खे अपना रही हैं. बच्चों में सुबह नाश्ता ना करने का चलन बढ़ रहा है. जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती जाती है, उनमें यह प्रवृत्ति बढ़ती हुई पाई जा रही है. स्कूल जाने वाली 15 साल की लड़कियों में से केवल आधी ने ही कहा कि वे सुबह नाश्ता करती हैं. बच्चों में सॉफ्ट ड्रिंक पीने का चलन भी बढ़ा है. सॉफ्ट ड्रिंक ना सिर्फ दांतों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि मोटापा बढ़ाने का भी प्रमुख कारण हैं.

इन आंकड़ों की तुलना 2009-10 के अंकड़ों से की गई, तो पाया गया कि पहले 24 फीसदी के मुकाबले अब ऐसे 17 फीसदी 15 साल के स्कूली छात्र हैं जिन्होंने 13 साल की उम्र में सिगरेट पीना शुरू कर दिया. यह भी पाया गया कि ज्यादातर देशों में लड़कियों के मुकाबले लड़के ज्यादा शराब पीते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सप्ताह में एक बार शराब पीने की घटनाएं स्कूली छात्रों में 21 फीसदी से घट कर 13 फीसदी हो गईं. रिपोर्ट में इस बारे में भी चिंता जताई गई है कि 11 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चे शारीरिक श्रम बहुत कम कर रहे हैं.

पहले के मुकाबले यौन संबंध बनाना भी 15 साल के लड़कों में 29 फीसदी से घट कर 24 फीसदी और 15 साल की लड़कियों में 23 फीसदी से घटकर 17 फीसदी हो गया है. दो तिहाई छात्रों ने कहा कि पिछली बार सेक्स के दौरान उन्होंने कंडोम का इस्तेमाल किया था. इस रिपोर्ट में खास कर 11, 13 और 15 साल के बच्चों को ध्यान में रखा गया.

परिवारों और दोस्तों के साथ बच्चों के संबंध से स्वास्थ्य का सीधा संबंध पाया गया. साथ ही इसमें पारिवारिक पृष्ठभूमि और संपन्नता का भी हाथ है. कोपनहेगन में विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोपीय कार्यालय की प्रमुख सुजैना जेकब के मुताबिक सरकारों को चाहिए कि वे इन अंकड़ों को लोगों में स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक रवैये को विकसित करने के लिए इस्तेमाल करें. बचपन में स्वास्थ्य के प्रति सजगता बड़े होने पर भी काम आती है.

एसएफ/आईबी (डीपीए)

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