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विज्ञान

लौट रही है गायब धरती

हिमयुग का एक कैंप कभी समुद्री किनारा होता था, अब 200 किलोमीटर दूर है. 15वीं सदी में जहां पानी था, अब वहां भेड़ें चरती हैं. स्वीडन का लुलिया इलाका फिर से जन्म ले रहा है.

भले ही मालदीव से लेकर मैनहैटन तक को इस बात की चिंता हो कि समुद्र का पानी बढ़ रहा है और उनकी जमीन उसमें समाने वाली है, लेकिन स्वीडन में हालात अलग हैं. पर्यावरणविद लेना बेंगटेन का कहना है, "एक तरह से हम लोग बेहद सौभाग्यशाली हैं." वह लुलिया नगर पालिका में रणनीतिकार हैं.

इस इलाके की जमीन हर साल करीब एक सेंटीमीटर ऊपर उठ रही है, जो विश्व में किसी दूसरी जगह से ज्यादा है. हिमयुग में आर्कटिक क्षेत्र से भारी मात्रा में बर्फ की परत हट गई थी, उसके बाद से यह किसी करिश्मे की तरह है.

फिनलैंड की आल्टो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्टिन वीरमीयर कहते हैं, "यह किसी फोम की तरह है. इसे अपने प्राकृतिक रूप में लौटने में समय लगता है." फिनलैंड में भी जमीन बढ़ने की वजह से हर साल सात वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल बढ़ जाता है.

आर्कटिक क्षेत्र के ठीक दक्षिण में लुलिया इलाके में धरती सपाट है और वहां ताड़ के पेड़ हैं. सर्दियों में यहां समुद्र जम जाता है और इलाके के बाढ़ में फंसने का खतरा नहीं रहता है. इसे देखते हुए लोगों के यहां रहने की संभावना बन सकती है.

लेकिन जमीन बढ़ने का मतलब खर्च भी है. लुलिया योजना बना रहा है कि वह अपने बंदरगाह को 2020 तक निचले स्तर पर ले आए, ताकि बड़े जहाज वहां आ सकें. इस काम में लगभग 25 करोड़ डॉलर लगेंगे. बंदरगाह प्रमुख रोजर डैनेल बताते हैं, "अगर हम बड़े जहाजों की महत्वाकांक्षा नहीं करें, तो भी छोटे जहाजों के लिए भी हमें ऐसा करना होगा."

स्वीडन के उत्तर में 200 किलोमीटर दूर और मौजूदा समय में समुद्र तल से 170 मीटर की ऊंचाई पर पुरातत्ववेत्ताओं को 10,700 साल पुराना पाषाणकाल का शिकारियों का कैंप मिला है. नॉरबोटेन्स म्यूजियम के ओलोफ ओस्टलुंड ने बताया, "हमने वहां मिली जली हुई हड्डियों की कार्बन डेटिंग की है." विश्लेषकों का कहना है कि यह जगह किसी विशाल तालाब के किनारे थी.

लुलिया में 15वीं सदी का एक चर्च भी है. इसे युद्ध के दौर में सुरक्षित स्थान समझ कर बसाया गया था. 10,000 साल पहले के हिमकाल के मुकाबले यह एक स्थान पर करीब 300 मीटर उठ चुका है.

यूरोप और उत्तरी गोलार्ध में कई जगह समुद्र के पास जमीन बढ़ रही है. मिसाल के तौर पर ग्रीनलैंड में भी. जानकारों का कहना है कि इस जगह पर गुरुत्वाकर्षण बल बर्फ की चादरों को खींच रहा है और इससे समुद्र के तल पर असर नहीं पड़ रहा है.

ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के प्रोफेसर डेविड वॉन का कहना है, "स्कैंडिनेविया फिर से जन्म ले रहा है. अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड के पास समुद्र तल नीचा हो रहा है. अब तक के सारे प्रोजेक्शन यही कहते हैं."

लुलिया में रहने वाले 56 साल के हांस लिंडबर्ग बताते हैं कि चीजें कैसे बदलीं, "पहले हम जब यहां से देखते थे, तो सिर्फ समुद्र दिखता था." वह उस जगह पर इशारा कर रहे थे, जहां अब हरी भरी घास दिख रही है. वह बताते हैं, "अब तो आप उस द्वीप पर चल कर जा सकते हैं. पहले हमारे पिता के पास एक बोट हुआ करता था, जिसमें सवार होकर हम वहां जाते थे." अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने 1960 के आस पास की तस्वीरें भी दिखाईं.

हालांकि यहां रहने वालों को इस बात की चिंता सता रही है कि चर्चा में आने के बाद इस जगह पर सैलानियों की भीड़ बढ़ सकती है और हो सकता है कि उनकी सीधी सादी जिंदगी में कुछ घाघ इंसान भी शामिल हो जाएं.

एजेए/एएम (रॉयटर्स)

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