लोग पसंद कर रहे हैं सीक्वल फिल्में | मनोरंजन | DW | 16.08.2014
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मनोरंजन

लोग पसंद कर रहे हैं सीक्वल फिल्में

वर्ष 1991 में फूल और कांटे फिल्म से अपना करियर शुरू करने वाले अभिनेता अजय देवगन अपने लंबे करियर में काफी उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजरे हैं. वह कहते हैं कि लोग सीक्वल फिल्में पसंद कर रहे हैं.

अजय देवगन कहते हैं कि मौजूदा पड़ाव पर एक फ्लॉप फिल्म से करियर पर कोई असर नहीं पड़ता. अपनी नई फिल्म सिंघम रिटर्न्स के प्रमोशन के सिलसिले में कोलकाता पहुंचे इस अभिनेता ने अपने अब तक के सफर के बारे में डॉयचे वेले के कुछ सवालों के जवाब दिए. पेश हैं उस बातचीत के मुख्य अंश:

हिंदी फिल्मोद्योग में फिलहाल सीक्वल फिल्मों का दौर चल रहा है. आप क्या सोचते हैं?

देखिए, दर्शक इन फिल्मों को पसंद कर रहे हैं. इसलिए निर्माता बना भी रहे हैं. यह विशुद्ध व्यावसायिक मामला है. जिस दिन लोग इन फिल्मों से ऊब जाएंगे तो निर्माता भी इनको बनाना बंद कर देंगे.

लेकिन एक अभिनेता अपनी हर फिल्म में नया किरदार तलाशता है. ऐसे में वह सीक्वल फिल्मों में एक ही किरदार के साथ न्याय कैसे कर सकता है?

दूसरों के बारे में तो नहीं पता. लेकिन मैं अपने हर किरदार में नयापन पैदा करने की कोशिश करता हूं. वह चाहे नई फिल्म हो या किसी पुरानी फिल्म का सीक्वल. सिंघम रिटर्न्स में किरदार भले पुराना हो, लेकिन कहानी और फिल्म की गति एकदम अलग है. इस फिल्म में एक्शन के दृश्य पिछली फिल्म यानी सिंघम से अलग और यथार्थ के करीब हैं.

फिल्मों के चयन का आपका पैमाना क्या है?

फिल्मों के चयन में पटकथा की भूमिका सबसे अहम होती है. पटकथा सुनते समय ही अभिनेता और निर्देशक के बीच आपसी समझ विकसित हो जाती है. आप तभी समझ जाते हैं कि यह फिल्म कैसी रहेगी.

फ्लॉप फिल्मों का करियर पर कितना असर पड़ता है?

किसी एक फिल्म की नाकामी से करियर पर खास असर नहीं पड़ता. अब मैं उस दौर को पार कर चुका हूं. इस उद्योग में लगभग 25 साल बीत गए. हर अभिनेता अपनी हर फिल्म में पिछली फिल्म से बेहतर प्रदर्शन करना चाहता है. हिट और फ्लॉप तो करियर का हिस्सा है.

किसी फिल्म की कामयाबी या नाकामी का श्रेय किसे मिलना चाहिए?

देखिए, फिल्म निर्माण एक टीम वर्क है. हमारे यहां फिल्म के हिट होने का श्रेय तो सभी लेना चाहते हैं. लेकिन नाकामी का श्रेय निर्देशक के माथे मढ़ दिया जाता है. जहाज का कप्तान होने के नाते निर्देशक की जिम्मेदारी ज्यादा जरूर है. लेकिन फिल्म फ्लॉप होने की स्थिति में भी सबको उसकी जिम्मेदारी कबूल करनी चाहिए.

क्या फिल्मों के चयन में सौ करोड़ के क्लब में शामिल होने की इच्छा की भी कोई भूमिका होती है?

वर्ष 2008 में अपनी फिल्म गोलमाल रिटर्न्स के जरिए मैंने ही सौ करोड़ के क्लब का कांसेप्ट शुरू किया था. उस फिल्म ने 120 करोड़ की कमाई की थी. तब मैंने इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा था. लेकिन पता नहीं क्यों अब लोग इसे गंभीरता से लेने लगे हैं. सौ करोड़ के क्लब में शामिल होने का दबाव अनावश्यक है. मैं तो फिल्म हाथ में लेते समय सिर्फ इस बात पर ध्यान देता हूं कि ज्यादा से ज्यादा दर्शक उसे देखें और पसंद करें. अब वह फिल्म सौ करोड़ का कारोबार करे या दो सौ करोड़ का, उससे मुझे खास फर्क नहीं पड़ता.

करीना कपूर के साथ आपकी केमिस्ट्री कैसी है?

करीना एक बड़ी स्टार और कमाल की अभिनेत्री हैं. उनसे मेरा परिचय बहुत पुराना है. वह बेहद पेशेवर अभिनेत्री हैं. शायद इसी वजह से उनकी गिनती मौजूदा दौर की श्रेष्ठ अभिनेत्रियों में होती है. सिंघम रिटर्न्स में हम दोनों की बीच काफी अच्छी केमिस्ट्री जमी है.

इंटरव्यू: प्रभाकर, कोलकाता

संपादन: महेश झा

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