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दुनिया

लोगों को तमीज सिखाएगा चीन

चीन की राजधानी बीजिंग एशिया प्रशांत संगठन एपेक शिखर सम्मलेन की तैयारी में लगा है. मंत्रियों के साथ आम जनता भी इस पेचीदा तैयारी का हिस्सा हैं.

चीन की राजधानी बीजिंग एशिया प्रशांत संगठन एपेक शिखर सम्मलेन की तैयारी में लगा है. मंत्रियों के साथ आम जनता भी इस पेचीदा तैयारी का हिस्सा हैं.

चीन ने अपने नागरिकों को सभ्य बनाने की मुहिम छेड़ी है. लोगों को सिखाया जा रहा है कि किस तरह से उन्हें कतार में खड़े रहना चाहिए, अपना नंबर आने तक इंतजार करना चाहिए, कहां सिगरेट पीनी चाहिए और कहां नहीं. सरकार चाहती है कि एपेक शिखर सम्मलेन के लिए आने वाले नेताओं पर बीजिंग की अच्छी छाप पड़े. इसीलिए उन्हें सड़क पर चलने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं. लोगों को बताया जा रहा है कि वे सड़कों पर यूं ही कहीं भी न फिरें, जेब्रा क्रॉसिंग पर ही सड़क पार करें और वह भी सिर्फ हरी बत्ती पर. साथ ही गाड़ी चालकों को भी समझाया जा रहा है कि शराब पीकर गाड़ी न चलाएं और जेब्रा क्रॉसिंग पर पैदल चलने वालों के लिए रुकें.

ये नियम हैं तो छोटे मोटे लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में अधिकतर लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. भारत के यातायात की भी यही हालत है. बीजिंग में सरकार ने कहा है कि वह "लोगों में शिष्टाचार और यातायात के प्रति शालीनता लानी चाहती है ताकि बेहतर रूप से इस बात का प्रदर्शन किया जा सके कि वहां के लोग कितने शानदार हैं."

एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग यानि एपेक की बैठक नवंबर में होगी और इसमें 20 देशों के नेता हिस्सा लेंगे. सरकार उम्मीद कर रही है कि इतने महीनों में लोगों को कुछ सिखाया जा सकेगा. इससे पहले 2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान भी इस तरह का अभियान चलाया गया था. उस समय सड़क पर चलने के नियमों के अलावा लोगों को बताया गया कि कचरा न फैलाएं और सड़क पर ना थूकें.

बीजिंग के सिविलाइजेशन ऑफिस के हान लॉन्गबिन ने बताया कि ओलंपिक वाले अभियान से काफी फायदा मिला था, "लेकिन लोग अभी भी लाल बत्ती पर नहीं रुक रहे हैं." बीजिंग की प्रदूषित हवा के चलते उसे स्मॉग की राजधानी भी कहा जाता है. इस बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक 'ब्लू डे' भी मनाया जाएगा जिसमें लोगों को सार्वजनिक यातायात इस्तेमाल करने और ऑर्गेनिक उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

आईबी/एजेए (एएफपी)

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