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जर्मन चुनाव

"लोगों का प्यार सबसे बड़ा जादू"

ताजमहल और चलती ट्रेन गायब करने का करिश्मा दिखाने वाले जादूगर और पश्चिम बंगाल की बारासत सीट से बीजेपी उम्मीदवार पीसी सरकार (जूनियर) का दावा है कि वह राजनीति में स्थायी रूप से आए हैं और दूसरे नेताओं की तरह गायब नहीं होंगे.

सरकार कहते हैं, "मैं लोगों के सपनों में हकीकत के रंग भर कर उनके जीवन में जादू लौटाना चाहता हूं." इस संसदीय सीट पर तृणमूल कांग्रेस की मौजूदा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के साथ कड़े मुकाबले में फंसे सरकार का नाम भले ही देश विदेश में जादूगर के तौर पर मशहूर हो, वह खुद आम लोगों को ही असली जादूगर मानते हैं. इंद्रजाल का यह जादूगर फिलहाल राजनीति के हिसाब किताब में उलझा है. पेश है पीसी सरकार से बातचीत.

आपके चुनाव अभियान को कैसा समर्थन मिल रहा है?

इलाके के लोग तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं. हाल में बलात्कार की कई घटनाओं की वजह से महिलाएं खुद को काफी असुरक्षित महसूस कर रही हैं. सीपीएम हो या तृणमूल कांग्रेस, किसी ने इलाके के विकास के लिए कुछ नहीं किया. मेरे रोड शो में भारी भीड़ उमड़ती है. इसके अलावा मेरा एक और कनेक्शन है, स्थानीय लोगों से. मेरा जन्म पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) में हुआ और बारासात इलाके के ज्यादातर लोगों की जड़ें भी बांग्लादेश में ही हैं. इसलिए अबकी मुझे लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है.

इलाके की समस्याओं से कैसे निपटेंगे?

एक जादूगर कभी अपना ट्रेड सीक्रेट नहीं बताता. मैं सही समय आने पर अपनी योजना को लागू कर दिखाना चाहता हूं. राजनेताओं की तरह हवाई वादों में मेरा भरोसा नहीं है. मैंने तमाम वोटरों को अपने विजिटिंग कार्ड दे दिए हैं. वह जब चाहे मुझसे संपर्क कर सकते हैं.

जादूगर के तौर पर कामयाब करियर के बावजूद राजनीति में आने का फैसला क्यों किया?

स्वामी विवेकानंद के दर्शन के प्रति बीजेपी का रुख ही मुझे राजनीति में खींच लाया. विवेकानंद के दर्शन को अपना कर बीजेपी ने खुद पर लगे सांप्रदायिकता के ठप्पे से काफी हद तक मुक्ति पा ली है और एक धर्मनिरपेक्ष ताकत के तौर पर उभरी है.

लेकिन इस नई पारी की जरूरत क्यों महसूस हुई?

मेरी पूरी जिंदगी आम लोगों के मनोरंजन में बीती है. मैं जादू से लोगों को एक ऐसे कल्पनालोक की सैर कराता रहा हूं जहां कुछ देर के लिए वे अपना सुख दुख और समस्याएं भूल जाते हैं. अब सही मायने में आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ही मैंने राजनीति में नई पारी शुरू की है.

राजनीति और जादू में क्या अंतर है?

यह भी एक जादू ही है. अंतर यह है कि इसका मंच व्यापक है. यहां जादूगर आम लोग हैं. वही अपने वोटों के जरिए यह फैसला करते हैं कि कौन मैदान में रहेगा और कौन गायब हो जाएगा.

क्या राजनीतिक करियर के लिए जादू छोड़ देंगे?

जादू तो मेरा पहला प्यार है. इसे भला कैसे छोड़ सकता हूं? इसके साथ राजनीतिक पारी भी जारी रहेगी. चुनाव अभियान खत्म होने के तुरंत बाद भी कई जगह मेरे शो होंगे. वे महीनों पहले से ही बुक हैं.

क्या जादू से अपने विरोधियों को गायब नहीं कर सकते?

एक ही मंत्र से उनको गायब किया जा सकता है और वह है आम लोगों का प्यार और समर्थन. लोगों का प्यार ही सबसे बड़ा जादू है.

इंटरव्यूः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः ए जमाल

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