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विज्ञान

लैब में बनेगा कृत्रिम रक्त

कई लोगों के लिए रक्त दान करना जिंदगी का हिस्सा है. लेकिन दुनिया भर में अस्पतालों को रक्त दान की कमी के कारण जूझना पड़ता है. कृत्रिम रक्त इस समस्या का समाधान हो सकता है.

सीनियर नर्स पैट्सी स्काउस कहती हैं कि यह छोटी उंगली पर सुई चुभाने का परीक्षण है. वह बताती हैं कि पहली बार रक्त दान करने वाले लोगों को परेशान होने से रोकने के लिए हिमोग्लोबिन स्तर की जांच का तरीका होता है. द स्कॉटिश नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवा विभाग को ब्रिटेन के चार फीसदी आबादी से ही रक्त दान मिलता है. फिलहाल ब्लड बैंक में कमी नहीं है. विभाग फिर भी नए रक्त दानकर्ताओं को प्रेरित करता रहता है. नर्स स्काउस बताती हैं कि खून क्लिनिकल वातावरण में जमा किया जाता है. क्लिनिक चाहता है कि "यह अनुभव खासकर पहली बार रक्त दान करने वालों को सकारात्मकता का एहसास कराए और वे यह महसूस करें कि उन्होंने कुछ बेहतर काम किया है." लेकिन विभाग भविष्य में रक्त की सप्लाई पर संभावित नई तकनीक पर भी काम कर रहा है जिसमें "कृत्रिम रक्त" भी शामिल है.

बड़े पैमाने पर उत्पादन और स्वच्छ

ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के चिकित्सा निदेशक मार्क टर्नर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में रक्त किस तरह से कृत्रिम तरीके से बनाया जा सकता है. टर्नर के मुताबिक, "हमें कुछ समय से पता है कि यह मुमकिन है कि लाल रक्त कणिकाओं को तथाकथित वयस्क स्टेम सेल से पैदा किया जा सकता है. लेकिन आप इस तरीके से बड़े पैमान पर इतना खून नहीं बना सकते हैं क्योंकि सेल की प्रतिबंधात्मक क्षमता उसे प्रचुर मात्रा में पैदा करने से रोकती है." वे बताते हैं कि वैज्ञानिक इस कदम पर आगे क्या कर सकते हैं. उनके मुताबिक बहु शक्ति स्टेम सेल-स्टेम सेल लाइंस या तो भ्रूण या फिर वयस्क ऊतक से प्राप्त किया जा सकता है. टर्नर के मुताबिक इन कोशिकाओं को प्रयोगशाला में संसाधित कर बड़े पैमाने में पैदा किया जा सकता है. "बड़े पैमाने पर रक्त का उत्पादन उचित समय में संभव है. लेकिन इस समय में हम इस चीज से बहुत दूर है. फिलहाल हमारा ध्यान लाल रक्त कणिकाओं के उत्पादन की कोशिश की तरफ है जो गुणवत्ता और सुरक्षा के लिहाज से सही हों. मानव परीक्षण के लिए उपयुक्त हो."

लैब से क्लिनिकल ट्रायल तक

टर्नर कहते हैं कि वे अब भी रक्त के औद्योगिक उत्पादन के सस्ते और सुरक्षित तरीकों तक नहीं पहुंचे हैं. टर्नर के मुताबिक, "हमारे पास अब यह चुनौती है कि प्रयोगशाला आधारित प्रक्रिया को उत्पादन वातावरण में ले जाएं जहां क्वालिटी कंट्रोल, विनियामक अनुपालन को कड़ाई से लिया जाता हो." वे कहते हैं कि इस प्रक्रिया को और अधिक मजबूती से नियंत्रित करने की जरूरत है. साथ ही उत्पादन की लागत भी. टर्नर के मुताबिक, "लाखों पाउंड खर्च कर लाखों रक्त कणिकाओं को बनाने का कोई तर्क नहीं है. कोई उसे इस्तेमाल नहीं करेगा." विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आबादी के लिए पर्याप्त रक्त की आपूर्ति रहती है. लेकिन दुनिया में ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जिन्हें पर्याप्त मात्रा और सुरक्षित रक्त नहीं मिलता है. टर्नर का कहना है, दुनिया में उपलब्ध 50 फीसदी खून का इस्तेमाल 15 फीसदी आबादी द्वारा किया जाता है जो बहुत ही उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में रहती है, "एक अनुमान के मुताबिक डेढ़ लाख महिलाओं की प्रसवोत्तर रक्त स्राव के कारण मौत हो जाती है. अगर पर्याप्त मात्रा में रक्त की सप्लाई होती है तो कई लोगों को बचाया जा सकता है."

रिपोर्ट: लियम स्टार्की/ एए

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

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