1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

लालू प्रसाद चारा घोटाले में दोषी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को चारा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है. मामले के 44 दूसरे आरोपियों को भी कोर्ट ने दोषी माना है और सजा गुरुवार को सुनाई जाएगी.

लालू प्रसाद को रांची के बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया है. दोषी करार दिए जाने के साथ ही लालू प्रसाद संसद की सदस्यता के लिए अयोग्य हो गए हैं और वह अगले छह साल तक चुनाव भी नहीं लड़ सकते. सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या इससे ज्यादा के कैद की सजा होती है तो वह दोषी करार दिए जाने के साथ ही अयोग्य हो जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने सांसदों और विधायकों को बचाने के लिए इस बारे में अध्यादेश लाकर नया कानून बनाने का फैसला किया है. हालांकि लालू यादव को इससे फौरी राहत मिलने की उम्मीद कम है क्योंकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस पर सवाल उठाए हैं. सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इसकी आलोचना कर इसके पास होने की राह में मुश्किल खड़ी कर दी है.

रांची में सीबीआई की विशेष अदालत ने जिन 44 और लोगों को दोषी माना है उनमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत छह राजनेता और चार आईएएस अधिकारी भी हैं. इन लोगों पर चाईबासा ट्रेजरी से फर्जी बिल बना कर 37.7 करोड़ रुपये निकालने का आरोप साबित हुआ है. यह मुकदमा 1996 में शुरू हुआ था. यह मामला चारा घोटाले से जुड़ा हुआ है. इसी तरह के फर्जी बिलों और दूसरे तरीकों से चारा घोटाले में करीब 900 से ज्यादा करोड़ रुपये का हेरफेर करने के आरोप हैं.

Lalu Prasad

चारा घोटाले में फंसने के बाद ही लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और फिर उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया. इसके बाद लालू यादव ने पटना की अदालत में समर्पण कर दिया. बिहार के बंटवारे के बाद मुकदमे के न्यायिक क्षेत्र पर विवाद उठा और मामले की सुनवाई बीच में कुछ दिनों के लिए रुकी रही. 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई रांची की अदालत में कराने का आदेश दिया.

इस साल लालू प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राजनीतिक वजहों से मामले को रांची से कहीं और ले जाने की बात कही थी लेकिन कोर्ट ने उनकी मांग भी नहीं मानी. इसके बाद लालू प्रसाद रांची की अदालत में हुई सुनवाई में शामिल हुए. 9 सितंबर से शुरू हुई बहस इसी महीने की 17 तारीख को पूरी हुई.

लालू प्रसाद को इस मामले में दोषी करार दिए जाने का बिहार की राजनीति के साथ ही केंद्र की राजनीति पर भी असर पड़ने के आसार हैं. अगले साल आम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. मुमकिन है कि केंद्र की सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी बिहार में अब सत्ताधारी दल जेडीयू को अपने साथ लाने की कोशिश करे. एनडीए से पल्ला छुड़ा चुके नीतीश को लुभाने की कोशिशें कांग्रेस ने पहले ही शुरू कर दी है.

एनआर/एमजे (पीटीआई)

DW.COM