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दुनिया

लाखों के कर्ज में अमेरिकी छात्र

मार्क वार्ड ने अभी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की है लेकिन उन पर 36 लाख का कर्ज चढ़ चुका है. यह बात अलग है कि उन्हें कोलंबिया यूनिवर्सिटी में डिग्री मिल रही है.

वार्ड संकट समाधान के विषय में कोलंबिया यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल कर रहे हैं. उन्होंने पिछले छह महीने से कर्ज उतारना शुरू किया है लेकिन अभी कुछ नहीं कम हुआ है. 28 साल की उम्र में 60,000 डॉलर (करीब 36 लाख रुपये) का कर्ज और ब्याज अलग. वह महीने के 150 डॉलर की किस्त भरते हैं. गैरसरकारी संगठन में काम करते हैं, जहां मामूली तनख्वाह मिलती है.

वार्ड जैसे कोई चार करोड़ छात्र हैं, जो अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं और मोटी फीस के बोझ से दबे हुए हैं. उन्हें अपनी पढ़ाई का खर्चा उठाना है. छात्रों को दिए जाने वाले कर्ज की रकम 1,200 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. यह रकम तेजी से बढ़ती जा रही है. पिछले सात साल में यह दोगुनी हो गई है यानी अमेरिका में पढ़ाई का खर्च बहुत तेजी से बढ़ रहा है. अनुमान है कि कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले छात्रों पर औसतन 35,000 डॉलर का कर्ज है.

छात्रों को मिलने वाले कर्ज में कोई रहम नहीं दिखाई जाती. आम तौर पर तो अगर कर्ज लेने के बाद कोई दीवालिया घोषित हो जाए, तो उसे पैसा वापस नहीं करना पड़ता लेकिन छात्रों के साथ ऐसा नहीं होता. इतना ही नहीं, इस साल के अंत तक इस कर्ज का ब्याज और बढ़ने वाला है. जुलाई के बाद से सरकारी लोन के ब्याज की दर लगभग दोगुनी यानी 6.8 फीसदी हो सकती है.

हालांकि राष्ट्रपति ओबामा और विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी चाहते हैं कि इस पर लगाम लगे लेकिन वे नए कानून पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं. छात्रों के हित की बात करने वाले संगठन यंग इनविंसिबल का अनुमान है कि सिर्फ एक साल की कॉलेज की पढ़ाई की वजह से हर छात्र को कर्च चुकाने तक 1,000 डॉलर हर साल केवल ब्याज के रूप में चुकाना पड़ रहा है.

दूसरे पश्चिमी देशों से अलग अमेरिका में ज्यादातर कॉलेजों में निजी पढ़ाई होती है. अमेरिकी यूनिवर्सिटी दुनिया में सबसे अच्छे हैं लेकिन इसके साथ सबसे महंगे भी हैं. कॉलेज बोर्ड एडवोकेसी एंड पॉलिसी सेंटर के मुताबिक 2012 में ग्रेजुएशन कर रहे औसत छात्र ने साल भर में 29,000 डॉलर की फीस भरी है, जो 10 साल पहले के मुकाबले 26 फीसदी ज्यादा है.

आज के युवाओं के लिए यह अजीब स्थिति है कि किसी से हजारों डॉलर का कर्ज लो. इस उम्मीद में कि पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी और अच्छी तनख्वाह मिलेगी और तब कर्ज वापस किया जा सकेगा लेकिन साथ में बेरोजगारी का खतरा भी परेशान करता है.

लगातार कर्ज में डूबते अमेरिकियों के लिए अपने घर का सपना सपना ही बनता जा रहा है. एक सर्वे में पता चला है कि 30 साल की उम्र में अब लोग पहले के मुकाबले कम घर लेने की स्थिति में हैं. यंग इनविंसिबल के जेन मिशोरी का कहना है, "हम युवाओं से सुन रहे हैं कि वे कार या घर खरीदने जैसे बड़े फैसलों को टाल रहे हैं."

विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह से आर्थिक संकट में भी सुधार नहीं हो रहा है. नोबेल पुरस्कार विजेता जोजेफ स्टिगलिट्ज का मानना है, "छात्रों के कर्ज की वजह से भी 2009 में शुरू हुए आर्थिक मंदी के ठीक होने में समय लग रहा है. जिन पर बड़े कर्जे हैं, वे अपने परिवार पर और आर्थिक बोझ लेने से पहले दस बार सोचते हैं. लेकिन अगर वे ऐसा करना चाहें भी, तो भी उन्हें इसमें मुश्किल होती है."

फिलहाल मार्क वार्ड इस हालत में नहीं है कि अर्थव्यवस्था की कुछ मदद कर सके. अमेरिका की अर्थव्यवस्था 70 फीसदी उपभोक्ताओं की खरीद (कंज्यूमर स्पेंडिंग) पर निर्भर है. इसके उलट उनकी मासिक किस्त बढ़ने वाली है, "जैसे जैसे कर्जा बढ़ रहा है, मैं समझ रहा हूं कि मैं बहुत से काम नहीं कर पाऊंगा."

एजेए/एनआर(डीपीए)

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