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दुनिया

लाओस में एशिया और यूरोप का महासम्मेलन

यूरोपीय संघ के 27 देशों के नेताओं की सोमवार को लाओस में एशियाई नेताओं के साथ हो रही एशिया यूरोप बैठक में बातचीत की लम्बी सूची है. आर्थिक सहयोग, आतंकवाद, जनसंहारक हथियारों के खिलाफ संघर्ष और ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा.

यूरोप और एशिया के देशों के संगठन आसेन की इस बार की शिखर वार्ता का नारा है शांति के दोस्त, समृद्धि के सहयोगी. बातचीत के विभिन्न मुद्दों के बावजूद बैठक पर यूरो संकट का असर छाया हुआ है.

यूरो संकट

एशियाई देशों के साथ सहयोग यूरोपीय देशों के लिए आर्थिक तौर पर बहुत अहम है. इस साल की पहली छमाही में यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों ने अपने सामानों के 31 फीसदी का निर्यात आसेम के सहयोगी देशों में किया, जबकि यूरोपीय आंकड़ों के अनुसार इन देशों के कुल निर्यात का 43 प्रतिशत आसेम देशों से आया. यूरो संकट आपसी कारोबार के लिए भी संकट पैदा कर रहा है.

रिसर्च सेंटर फ्रेंड्स ऑफ यूरोप की शादा इस्लाम का कहना है कि एशियाई देश अत्यंत चिंतित हैं. "यूरो जोन की मुश्किलें एशिया के लिए मुसीबतें खड़ी कर रही हैं और एशियाई देशों को उससे प्रभावित होने का डर सता रहा है." हालांकि एशिया में विकास की रफ्तार इस समय अच्छी है, लेकिन चिंताएं बनी हुई हैं. ब्रसेल्स में ईयू-एशिया सेंटर के कैमरन फ्रेजर कहते हैं, "एशियाई नेता यूरोप से पूछेंगे, कब अपने घर को व्यवस्थित करोगे?"

जर्मनी की भूमिका

शादा इस्लाम का कहना है कि यूरोप को इस बात की कोशिश करनी होगी कि वह एशिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहे. "यूरोप एशिया के लिए उच्च प्राथमिकता नहीं है. एशिया तेजी से अमेरिका और खुद अपनी ओर रुख कर रहा है. इसलिए यूरोप को प्रयास बढ़ाने होंगे." जर्मन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्टिन शेफर ने कहा कि यूरोप एशियाई नेताओं को बताएगा कि कर्ज संकट से निबटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. यूरोपीय आयोग के डेविड ओसलिवन सहयोग बढ़ाए जाने पर जोर देते हैं. यह सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं होगा बल्कि सुरक्षा और विदेश नीति को भी शामिल करेगा. "भविष्य और एशिया के सफल विकास में हमारी केंद्रीय भूमिका है, और इसमें हम योगदान देते रहेंगे."

जर्मनी की इसमें खास जिम्मेदारी है, एशिया विशेषज्ञ शादा इस्लाम का कहना है, "एशियाई सहयोगियों के बीच जर्मनी की अच्छी छवि है. जर्मनी लम्बे समय से एशिया में सक्रिय है और उसे भरोसेमंद समझा जाता है. इसलिए यूरोप और एशिया के रिश्तों में बर्लिन की केंद्रीय भूमिका है." सचमुच किसी और यूरोपीय देश का एशियाई देशों के साथ ऐसा व्यापक आर्थिक सम्पर्क नहीं है, जितना जर्मनी का. 2012 की पहली छमाही में यूरोपीय संघ और एशियाई देशों के बीच जो कारोबार हुआ है उसमें कुल निर्यात का 35 फीसदी जर्मनी के साथ हुआ है जबकि कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 20 फीसदी रही है.

विवादों में रुख

आसेम बैठक में यूरो संकट के अलावा अमेरिका की एशिया नीति भी चर्चा के केंद्र में रहेगी. एक साल पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका और गहन बनाने की घोषणा की. एशिया नीति में परिवर्तन के बाद अमेरिका ने उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में 2,500 सैनिकों को तैनात करने का फैसला लिया. चीनी सरकार ने इसे चीन पर सैन्य नियंत्रण की कोशिश समझा है. फ्रेजर कैमरन चेतावनी देते हैं, "ईयू को सावधान रहना होगा. ईयू और अमेरिका की एशिया नीति में समानताएं हैं, लेकिन अंतर भी है. ईयू को सावधानी से इस बात का चुनाव करना होगा कि वह कहां और किस तरह दिखना चाहता है."

ASEM Treffen in Gödöllö Ungarn

विवाद की संभावना पूर्वी चीनी सागर में जापान और चीन के तनाव में भी है. चीन और जापान दोनों ही कुछ द्वीप समूह पर दावा कर रहे हैं जहां मछलियों का विशाल भंडार तो है ही, तेल और गैस का बड़ा भंडार होने की भी संभावना है. जर्मन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्टिन शेफर कहते हैं, "हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि विवाद की हालत में सभी पक्ष संयम दिखाएं और आपस में संवाद करें. बातचीत पर आधारित राजनीतिक समाधान स्थायी शांतिपूर्ण समाधान होगा."

इस साल की बैठक में यूरोप के 27 देशों के अलावा एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 देशों के साथ साथ पहली बार नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और बांग्लादेश भी भाग लेंगे. यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व ईयू के अध्यक्ष हरमन फान रॉमपॉय और आयोग प्रमुख सोजे मानुएल बारोसो कर रहे हैं. जर्मनी का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले करेंगे. भारत इस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए एक व्यापक संधि का मुद्दा उठाएगा. भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी करेंगे.

रिपोर्टः रूथ क्राउस/एमजे

संपादनः एन रंजन

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