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दुनिया

लाइन पर आया भारतीय ओलंपिक संघ

भ्रष्टाचार और बदइंतजामी के आरोपों से जूझते भारतीय ओलंपिक संघ को आखिरकार अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की सख्ती के सामने झुकना पड़ा है. शर्मनाक बर्खास्ती से पहले ही भारतीय ओलंपिक संघ ने अपने संविधान में संशोधन किया.

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बाख की सख्ती

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रमुख थोमस बाख ने साफ शब्दों में भारत को चेतावनी दी थी कि वो या तो दागियों को संघ में घुसने से रोके या फिर ओलंपिक खेलों से दूर रहे. करीब साल भर से चल रहे इस विवाद के बावजूद भारतीय अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही थी. सुधार न होते देख पिछले हफ्ते बाख ने भारतीय ओलंपिक संघ को 11 दिसंबर तक अल्टीमेटम दिया.

इसका सख्ती का असर हुआ. रविवार को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अपने संविधान में संशोधन किया. संशोधन के तहत भारतीय ओलंपिक संघ ने दागी अधिकारियों के लिए संस्था के दरवाजे बंद कर दिये हैं. किसी भी तरह का अदालती आरोप झेल रहे अधिकारी अब ओलंपिक संघ का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति चाहती है कि उसकी हर शाखा में भ्रष्ट अधिकारियों के लिए कोई जगह न हो.

ओलंपिक संघ या दागी संघ

भारतीय ओलंपिक संघ अब तक ऐसा करने से इनकार कर रहा था. इस जिद के चलते बीते साल दिसंबर में भारत को ओलंपिक से निलंबित कर दिया गया था. ओलंपिक संघ के महासचिव ललित भनोट दिल्ली के कॉमनवेल्थ घोटाले के आरोप में 10 महीने जेल में बिता चुके हैं लेकिन इसके बावजूद भनोट महासचिव चुने गए. आईओए के पूर्व प्रमुख सुरेश कलमाड़ी पर भी कॉमनवेल्थ घोटाले के मुकदमे चल रहे हैं. कलमाड़ी भी संघ में वापस लौटने की काफी कोशिशें कर रहे थे, लेकिन खेल मंत्रालय और कोर्ट के दबाव में वह वापसी नहीं कर सके.

Lalit Bhanot Commonweathspiele Delhi 2010

ललित भानोट

आईओए अध्यक्ष अभय चौटाला पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के बेटे अभय पर टीचर भर्ती घोटाले के आरोप हैं. संविधान संशोधन के बाद अभय चौटाला भी आईओए के चुनाव में खड़े नहीं हो सकेंगे. संघ के नए चुनाव नौ फरवरी को होने हैं.

शर्म से सावधान

संशोधन की जानकारी देते हुए आईओए अधिकारी एस रघुनाथन ने कहा, "आईओए ने पूर्ण बहुमत से संविधान की उन धाराओं को संशोधित करने का फैसला किया है जो आरोपी व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकेंगी. चौटाला और भनोट आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे."

संशोधन के बाद आईओए को उम्मीद है कि उसके खिलाफ उठाया गया निलंबन का कदम वापस लिया जाएगा. लेकिन आईओए के संशोधित संविधान पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की मुहर लगने के बाद ही निलंबन पर कोई फैसला किया जाएगा.

ओलंपिक से बाहर होना अंतरराष्ट्रीय छवि के लिहाज से शर्मनाक है. अगर ऐसा हुआ तो भारत ओलंपिक आंदोलन के बाद बाहर होने वाला दूसरा देश होगा. 40 साल पहले रंगभेदी नीतियों के चलते दक्षिण अफ्रीका को बाहर किया गया था.

ओएसजे/एमजे (एपी)

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