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विज्ञान

'लव हार्मोन' से दुबलेपन का इलाज

दिगाम में बनने वाले ऑक्सीटॉसिन रसायन को 'लव हार्मोन' के नाम से भी जाना जाता है. रिसर्चरों को उम्मीद है कि इससे एनोरेक्सिया का इलाज संभव है. इस बीमारी का संबंध मरीज की खानपान से दूरी और दुबला होने की धुन से है.

एनोरेक्सिया के मरीजों पर शोध कर रिसर्चरों ने पाया कि ऑक्सीटॉसिन से उनके खाने पीने की आदतें बदलने लगती हैं. मोटापा बढ़ाने वाला वसायुक्त खाने और मोटापे के प्रति उनकी नकारात्मक प्रतिक्रिया घटने लगती है. इससे शरीर को कमजोर बनाने वाली और खाने पीने से दूर भागने की उनकी आदतें बदल सकती हैं.

मरीज की भोजन संबंधी आदतों और शरीर के अत्यधिक पतला होने की वजह से कई बार दूसरी कई दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं. उन्हें घबराहट की समस्या होने लगती है और वे छोटी छोटी बातों के प्रति अतिसंवेदनशीलता हो जाते हैं.

किंग्स कॉलेज लंदन स्कूल ऑफ साइकेट्री की प्रोफेसर जैनेट ट्रेजर कहती हैं, "एनोरेक्सिया से जूझ रहे मरीजों को कई सामाजिक दिक्कतें आती हैं जो कि बीमारी के ज्यादा बढ़ने से पहले उनकी किशोरावस्था में ही शुरू हो जाती हैं." उन्होंने ऑक्सीटॉसिन हार्मोन पर दो अध्ययन किए हैं. उन्होंने बताया, "एनोरेक्सिया के इलाज में ऑक्सीटॉसिन के इस्तेमाल से हम इस तरह की कुछ समस्याओं पर गौर कर रहे हैं."

इंसानों में आपसी जुड़ाव, यौन संबंध, बच्चे की पैदाइश या बच्चे को दूध पिलाने जैसे कामों में शरीर से प्राकृतिक ढंग से ऑक्सीटॉसिन निकलता है. कई मनोरोगों के इलाज में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. कुछ रिसर्चों के मुताबिक ऑटिज्म के मरीजों को सामाजिक परिस्थितियों में होने वाली घबराहट को भी इसकी मदद से नियंत्रित किया जा सकता है.

शुरुआती दो अध्ययनों में ट्रेजर की टीम ने एनोरेक्सिया के 31 मरीजों का परीक्षण किया. उन्हें ऑक्सीटॉसिन की डोज दी गई. दवा देने से पहले और बाद में उन्हें कम और उच्च वसा वाला खाना और पतले व मोटे शरीर की तस्वीरें दिखाई गईं. वैज्ञानिकों ने इस बात पर गौर किया कि तस्वीर देखते ही कितनी तेजी से मरीजों में प्रतिक्रिया हुई.

अगर उनमें तस्वीर को देखकर नकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति होती है तो वे उन्हें जल्द पहचान लेते हैं और जल्द प्रतिक्रिया देते हैं. साइकोन्यूरोएंडोक्राइनोलॉजी पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सीटॉसिन दिए जाने के बाद मरीजों की प्रतिक्रिया की रफ्तार धीमी हो गई. ज्यादा फैट वाला भोजन और मोटापा उनका ध्यान कम खींचता है.

ट्रेजर की टीम के साथ इस रिसर्च पर काम करने वाले सियोल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक योल री किम ने बताया, "हमारी रिसर्च से यह पता चला है कि ऑक्सीटॉसिन से मरीज की खाने और शरीर के आकार के प्रति अनजाने में ही होने वाली नकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति कम हो जाती है." उनका मानना है कि इन नतीजों के आधार पर एनोरेक्सिया के मरीजों का ऑक्सीटॉसिन की मदद से बेहतर इलाज किए जाने की उम्मीद की जा सकती है.

एसएफ/ओएसजे (रॉयटर्स)