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दुनिया

'लव जिहाद' मामले में प्रेमी युगल के हक में फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'लव जिहाद' के दावों के साथ दर्ज हुए एक साल पुराने अपहरण, गैंगरेप और धर्मांतरण के मामले में दंपति के हक में फैसला सुनाया है. अदालत में हिन्दू पीड़िता ने आरोपी मुस्लिम प्रेमी के साथ जाने की इच्छा जताई.

मेरठ की कथित गैंग रेप पीड़िता को 15 अक्टूबर को उत्तर भारतीय राज्य यूपी के इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने पेश किया गया जहां उसने मुकदमे के आरोपी कलीम के साथ जाने की इच्छा जताई. अदालत ने अपने फैसले में कहा, "पीड़िता बालिग है, उसे यह तय करने की आजादी है कि वह किसके साथ जाना चाहती है - कलीम के साथ या फिर किसी और के साथ."

अगस्त 2014 में मेरठ के खरखौदा थाना क्षेत्र की निवासी युवती से सामूहिक रेप व धर्मांतरण का मामला सामने आया था. पीड़िता के बयान और पुलिस की जांच के आधार पर कुल दस आरोपियों को जेल भेजा गया. इसमें कलीम पर रेप की धाराओं में मामला दर्ज हुआ था. घटना के समय बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ ने इसे लव जिहाद के कई मामलों में से एक बताया था, जिसके मुताबिक मुसलमान युवक प्रेम में फंसाकर युवतियों को धर्मांतरण के लिए उकसाते हैं.

लेकिन बाद में पीड़िता अपने बयान से पलट गई. पीड़िता ने थाने पहुंचकर अपने परिवार से उसको जान का खतरा होने का आरोप लगाया. सिटी मजिस्ट्रेट को दिए बयान में पीड़िता ने केस के आरोपी कलीम के साथ अपनी मर्जी से जाने की बात स्वीकार की. घर जाने से इंकार करने पर पीड़िता को नारी निकेतन भेज दिया गया.

पीड़िता के मुताबिक बीजेपी के विनीत अग्रवाल उनके परिवार को रेप का मामला जारी रखने के लिए पैसे दे रहे थे. जैसे ही पैसे आने बंद हुए उनका खुद का परिवार इस बात को नहीं स्वीकार पाया कि पीड़िता के मुस्लिम युवक से संबंध हैं. इसके बाद परिवार उसके खिलाफ हो गया. पीड़िता के मुताबिक खुद अपनी जिंदगी को खतरे में देख उसने पुलिस के सामने सारी सच्चाई बयान कर दी. इसके बाद महिला के परिवार और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ.

पीड़िता के वकील कृष्ण कुमार ने अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जिन 10 युवकों पर महिला का बलात्कार करने का आरोप था वे जमानत पर हैं. उन्होंने कहा, "जिस तरह चीजें जा रही हैं इनसे लगता है कि उन सभी को क्लीन चिट मिल जाएगी और मामला बंद हो जाएगा."

एसएफ/आरआर

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