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दुनिया

"लव जिहाद" की जांच करे एनआईएः सुप्रीम कोर्ट

भारत की सर्वोच्च अदालत ने केरल के एक मामले में "लव जिहाद" के आरोपों की जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपा है. केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में एक शादी को अवैध बताते हुए लड़की को उसके पिता के पास भेज दिया था.

केरल में रहने वाली 24 होम्योपैथ की डॉक्टर अखिला अशोकन इस्लाम धर्म कबूल करने के बाद हादिया बन गई और पिछले साल दिसंबर में साफिन जहान नाम के एक शख्स के साथ शादी कर ली. अखिला के पिता का आरोप है कि साफिन के आईएसआईएस से संबंध हैं और उसी के दबाव डालने पर उनकी बेटी ने पहले इस्लाम कबूल किया और फिर उससे शादी की. इस दावे के साथ वो अदालत में गए और उनकी शादी को अवैध बताया. अखिला के पिता का ये भी आरोप है कि साफिन उनकी बेटी को आईएस में भर्ती कराना चाहता है. हालांकि हादिया ने केरल हाई कोर्ट में कहा है कि वह साफिन के संपर्क में इस्लाम कबूल करने के बाद एक शादी कराने वाली वेबसाइट के जरिये आई. शादी के दो दिन बाद ही हादिया को हाई कोर्ट में पेश होने का नोटिस मिला. उसके परिवारवालों ने जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया था.

केरल हाई कोर्ट ने पिता के दावे पर भरोसा करते हुए हादिया की शादी इसी साल मई में रद्द कर दी और उसे अपने मां बाप के साथ जा कर रहने को कहा. इसके बाद जुलाई में साफिन जहान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनकी शादी दो वयस्कों की रजामंदी से हुई शादी थी जिसे उसके परिवार के कहने पर खत्म नहीं किया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को आदेश दिया है कि वह इस शादी के रद्द होने में "लव जिहाद" के आरोपों की जांच करे. जास्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ का कहना है कि इस मामले में वह एनआईए की जांच, केरल हाई कोर्ट का नजरिया और केरल पुलिस की रिपोर्ट को देखने के बाद अपनी राय देगा. एनआईए की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज आर वी रवींद्रन करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट इन आरोपों की छानबीन करना चाहता है कि क्या सचमुच मनोवैज्ञानिक दबाव बना कर प्यार और शादी के जरिये लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. हिंदूवादी संगठन इस तरह के आरोप लगाते आए है और "लव जिहाद" का नाम भी उन्होंने ही दिया है.

निखिल रंजन

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