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खेल

ललित मोदी ने बीसीसीआई को कोर्ट में घसीटा

आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई से निलंबित किए जाने के फैसले के खिलाफ बॉम्बे उच्च अदालत में अर्जी दी है. उन्होंने अपने निलंबन को रद्द करने की मांग की है.

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मोदी की अर्जी उनके वकील महमूद आबदी ने पेश की. बीसीसीआई के फैसले को रद्द करने के साथ साथ मोदी ने मांग की है कि कारण बताओ नोटिस को लेकर उनके जवाबों की जांच के लिए अदालत एक ऐसे व्यक्ति या पैनल को नियुक्त करे जिस पर दोनों पार्टियों को सहमति हो. बीसीसीआई ने 25 अप्रैल को मोदी को निलंबित करने का आदेश दिया था. इसके बाद 26 अप्रैल, 6 मई और 31 मई को उन्हें तीन कारण बताओ नोटिस भेजे गए थे.

मोदी ने अदालत से आग्रह किया कि वह इस आदेश को वापस ले और कारण बताओ नोटिसों की कार्रवाई आगे बढ़ाएं. मोदी ने यह भी मांग की है कि कारण बताओ नोटिस को लेकर और कोई कदम नहीं उठाए जाएं और तीन सदस्यों के अनुशासनात्मक आयोग के फैसले को भी रोका जाए. इस आयोग का गठन तीन जुलाई को एक खास आम बैठक में किया गया. आयोग में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, आईपीएल के अंतरिम प्रमुख चिरायु आमीन और अरुण जेटली शामिल हैं.

इसके अलावा मोदी ने बीसीसीआई सचिव एन श्रीनिवासन द्वारा अनुशासनात्मक आयोग को उनका मामला सौंपने की बात पर भी आपत्ति जाहिर की है. बीसीसीआई ने श्रीनिवासन के फैसले की पुष्टि की थी. अपनी अर्जी में मोदी ने बीसीसीआई प्रमुख शशांक मनोहर, सचिव श्रीनिवासन और अनुशासनात्मक आयोग के तीन सदस्यों को जिम्मेदार बताया है.

6 जुलाई को मोदी ने आबदी के जरिए इन छह लोगों को एक नोटिस भेजा था जिसमें उन्होंने अनुशासनात्मक आयोग को खत्म करने की मांग की थी और कहा था कि पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जजों को रखा जाए. उन्हें डर था कि वर्तमान पैनल के लोग उनके खिलाफ पक्षपात करेंगे. उन्होंने यह भी लिखा कि आमीन नई बनी पुणे की टीम में निवेशक थे और उन्होंने इससे पहले आईपीएल की टीमों के लिए बोली भी लगाई थी लेकिन सफल नहीं हुए.

रिपोर्टः पीटीआई/एम गोपालकृष्णन

संपादनः ए जमाल

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