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दुनिया

लड़ाकू दस्ते में शामिल होंगी भारतीय महिलाएं

भारतीय महिलाएं अब ना केवल लड़ाकू विमान उड़ाएंगी, बल्कि थल सेना के लड़ाकू दस्तों में भी लड़ेंगी. भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने थल, जल और वायु सेना के लड़ाकू दस्तों में भी महिलाओं की तैनाती की घोषणा की.

दुनिया की लगभग सभी सेनाओं में परंपरागत रूप से पुरुषों के दबदबे वाला पेशा रही सशस्त्र सेना में भारत का एक ऐतिहासिक कदम. सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भर्ती तो होती आई है लेकिन जर्मनी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इस्राएल जैसे मुट्ठी भर देशों में ही उन्हें लड़ाकू दस्तों में रखा जाता है. अब दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में शामिल भारत भी अपनी तीनों शाखाओं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में महिलाओं को लड़ाकू विमान और लड़ाकू टुकड़ियों का हिस्सा बनाने जा रहा है.

अब तक इस बात पर सबसे बड़ी चिंता जताई जाती रही है कि दुश्मन सेना के कब्जे में जाने पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो सकता है. इसके अलावा पहली पंक्ति के लड़ाकू दस्तों के शारीरिक और मानसिक दबावों को झेलने के लिए भी महिलाओं को योग्य नहीं माना जाता था. संसद के बजट सत्र की शुरुआत की पूर्वसंध्या पर दोनों सदनों को संबोधित करते हुए सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भविष्य में इन सेवाओं में महिलाओं को रखे जाने की घोषणा की.

राष्ट्रपति मुखर्जी ने यह भी कहा कि "हमारे देश में 'शक्ति' जिसका अर्थ है ताकत है, उसे महिला ऊर्जा की अभिव्यक्ति मानते हैं. यह शक्ति हमारी ताकत है."

भारतीय सेना के नॉन-मेडिकल पदों पर महिलाओं की नियुक्ति 1992 में शुरु हुई. लेकिन आज भी 10 लाख से भी अधिक सशस्त्र सेना कर्मियों में केवल 2.5 प्रतिशत महिलाएं हैं. इनमें भी ज्यादतर प्रशासनिक अधिकारी, खुफिया अधिकारी, डॉक्टरों, नर्सों और दंत चिकित्सकों के रूप में काम करती हैं.

अक्टूबर 2015 में सरकार ने महिलाओं को लड़ाकू बलों में शामिल करने की ओर पहले कदम उठाए थे. जून 2017 से तीन सालों तक की प्रायोगिक अवधि में भारतीय वायु सेना की महिला पायलट युद्धक विमान उड़ाएंगी. महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है. साथ ही यह भी माना है कि सशस्त्र सेनाओं में असली लैंगिक बराबरी लाना एक धीमी प्रक्रिया है जिसमें काफी वक्त लगेगा.

भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने बताया है कि इसे कई चरणों में पूरा किया जाएगा. भारतीय वायु सेना सबसे पहले महिलाओं को लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए तैनात करेगी और उसके बाद जल सेना उन्हें अपने निगरानी वाले विमान उड़ाने की जिम्मेदारी देने की योजना बना रही है.

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