लड़कियां दिला सकती हैं गरीबी से छुटकारा | दुनिया | DW | 21.10.2016
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दुनिया

लड़कियां दिला सकती हैं गरीबी से छुटकारा

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि विकासशील देश यदि लड़कियों के स्वास्थ्य और सेक्स एजुकेशन को बेहतर बनाने पर ध्यान दें तो उन्हें 21 अरब डॉलर का फायदा हो सकता हैं.

जनसंख्या पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएन पॉपुलेशन फंड का कहना है कि विकासशील देशों में बहुत सी लड़कियां स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाती हैं. उन्हें जबरन बाल विवाह, बाल मजदूरी, खतना और अवसरों से वंचित रखे जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. यूएनएफपीए की एक हालिया रिपोर्ट कहती है, "सिर्फ अगले 15 साल में विकासशील देश 21 अरब डॉलर का फायदा हासिल कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए वहां आज 10 साल की लड़कियों की सेहत, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाने होंगे."

यूएनएफपीए के बयान में कहा गया है, "अगर युवा लोगों की प्रतिभा को विकसित करने के लिए सही नीतियां अपनाई जाएं, तो विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि में बहुत अधिक इजाफा हो सकता है. इससे वहां रहने वाली आबादी को सीधे फायदे मिलेंगे, नई आर्थिक संभावनाएं पैदा होंगी और गरीबी को घटाया जा सकेगा."

ये हैं लड़कियों के लिए सबसे अच्छे देश

दुनिया भर में 10 साल के कुल बच्चों में से 70 फीसदी बच्चे अरब और अफ्रीकी देशों में रहते हैं. लेकिन वहां बहुत से बच्चों को प्राइमरी स्कूल के बाद पढ़ने के अवसर नहीं मिल पाते. छह से 11 साल की 1.6 करोड़ लड़कियां कभी स्कूल नहीं जा पाती. वहीं, ऐसे लड़कों की संख्या 80 लाख के आसपास है.

रिपोर्ट कहती है कि गरीब देशों में लड़कियों को पढ़ाकर गरीबी के खिलाफ लड़ाई ज्यादा कारगर तरीके से लड़ी जा सकती है. यूएनएपपीए ने सभी देशों से शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल करने को कहा है क्योंकि कम उम्र में शादी होने से लड़कियां का स्कूल छूट जाता है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि हर दिन 18 साल से कम उम्र की 47,700 लड़कियों की शादी कर दी जाती है.

देखिए 15 साल से पहले सेक्स संबंध बनाने वाली लड़कियां

रिपोर्ट कहती हैं कि 10 साल तक की उम्र की लड़कियों को सेक्स एजुकेशन देने के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाए जाने की जरूरत है ताकि वो अपनी सेहत की हिफाजत कर सकें और अपने प्रजनन को नियंत्रित कर सकें. इसके मुताबिक, "बहुत सी लड़कियां नहीं जानती हैं कि इस तरह के विषयों पर अपने सवालों के जबाव वो कहां से हासिल करें. बहुत देशों में अब भी इस बारे में बात करना अच्छा नहीं माना जाता."

इस अध्ययन रिपोर्ट में भारत और चीन का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि अगर युवा लोगों पर ध्यान दिया जाए तो तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं. इससे नए रोजगार पैदा होते हैं और आमदनी बढ़ती है.

एके/एमजे (एएफपी, रॉयटर्स)

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