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विज्ञान

लग सकती है नाक के स्प्रे की लत

नाक के स्प्रे और इनहेलर जुकाम के दौरान जल्द राहत तो पहुंचाते हैं, पर इनसे लत लगने और नाक को नुकसान पहुंचने का बड़ा खतरा होता है.

बंद नाक को खोलने वाले नाक के स्प्रे और इनहेलर आपकी लत बन सकते हैं. जर्मनी की डॉक्टर एरिका बाउम का चेतावनी देते हुए कहती हैं, "दो हफ्ते तक लगातार इनका इस्तेमाल करने के बाद शरीर को इनकी लत लगने लगती है. इसके बाद कई लोगों के लिए इन्हें छोड़ना मुश्किल और कईयों के लिए तो नामुमकिन सा हो जाता है." डॉक्टर एरिका बाउम जर्मन कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स एंड फैमिली फिजिशियंस संगठन की उपाध्यक्ष हैं, जो कि एक गैरसरकारी स्वास्थ्य संस्था है.

नाक के स्प्रे में फिनाइललेफ्रीन नाम का तत्व होता है. यह नाक की परत पर मौजूद खून की नलियों को सिकोड़ने का काम करता है, जिससे नाक खुलने का एहसास होता है. लेकिन इसका उल्टा नतीजा यह भी हो सकता है कि धीरे धीरे नाक को इस तत्व की आदत पड़ जाए और नालियां सिकुड़ना बंद हो जाएं. ऐसे में डोज बढ़ा देनी पड़ती है यानि आप बार बार स्प्रे और इनहेलर का इस्तेमाल करने लगते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि नाक को इसकी इतना ज्यादा आदत पड़ जाए कि बिना फिनाइललेफ्रीन के नाक खुल ही ना सके. स्प्रे ना लेने पर नाक की हालत बद से बदतर होने लगेगी. तब आप पूरी तरह इनहेलर पर निर्भर करने लगेंगे.

डॉक्टर बाउम चेतावनी देती हैं, "अगर आप बहुत ज्यादा वक्त तक इनका इस्तेमाल करेंगे तो नाक सूखने लगेगी और श्लेष्मा झिल्ली यानि म्यूकस मेम्ब्रेन को भारी नुकसान पहुंच सकता है." इसलिए वह सलाह देती हैं कि इनसे दूर ही रहें. अगर स्प्रे लेना जरूरी हो तो उन्हें पानी में मिला कर इस्तेमाल करें ताकि नाक पर उनका बहुत ज्यादा असर ना हो. साथ ही बहुत जल्दी जल्दी इनका इस्तेमाल ना करें. खास कर बच्चों को इनकी आदत से बचाएं क्योंकि उन्हें लत लगने में कम समय लगता है.

आईबी/एमजे (डीपीए)

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