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विज्ञान

लकड़ी से बनेंगी कृत्रिम हड्डियां

जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को कई बार सेरेमिक या टाइटन पत्थर का कृत्रिम घुटना लगाया जाता हैं. लेकिन इसकी वजह से होने वाली समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अब वैज्ञानिकों ने लकड़ी से कृत्रिम हड्डियां बनानी शुरू की हैं.

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जोड़ों में दर्द रहना आजकल बहुत ही आम समस्या है. कई बार यह इतनी बढ़ जाती है कि हड्डियों को बदलना भी पड़ जाता है. घुटनों में अत्यधिक परेशानी के कारण कई बार असली घुटना निकाल कर उसकी जगह चीनी मिट्टी या फिर टाइटन पत्थर का बनावटी घुटना लगाया जाता है. लेकिन कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो जाती है और कुछ लोगों का शरीर इन अप्राकृतिक चीजों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर पाता. इसी समस्या का हल निकालने की कोशिश की है इतावली वैज्ञानिक अन्ना ताम्पिअरी ने. उन्होंने टैम-प्लांट नाम के अपने प्रोजेक्ट के तहत लकड़ी से हड्डियां बनाई है.

अन्ना का मानना है कि गंभीर रूप से हड्डी की चोट में यह सहायक साबित हो सकेगा. उनका कहना है कि इस नए ढांचे का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह असली हड्डी की संरचना पर आधारित है. इसके आसपास जीवित कोशिकाओं का विकास आसानी से हो जाता है. इस तरह अंतिम परिणाम भी अच्छा ही होता हैं. लकड़ी झिरझिरी और जैविक होती है, जो उसे चीनी मिटटी या धातु से बने ढांचों से अलग बनाती है. इसीलिए शरीर को इसे स्वीकारने में ज़्यादा दिक्कत नहीं होती. साथ ही उसकी संरचना हड्डियों से बहुत मेल खाती है.

इस तरह कृत्रिम हड्डियां बनाने के लिए लड़की को इतना गर्म किया जाता है कि उसमें सिर्फ कार्बन ही बचे. इसे आप चारकोल की तरह समझ सकते हैं. इसके बाद इसमें अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं जो इसे हड्डियों जैसी मजबूती देते हैं. इटली के विकलांग चिकित्सक मार्सिलियो मरसाची इसे भविष्य के लिए लाभकारी मानते है. वे कहते हैं कि हड्डियां दान करने वाले बड़ी मुश्किल से मिलते हैं. कई बार डोनर बैंक से हड्डियां मिल भी जाती हैं तो भी आप यह यकीन से नहीं कह सकते कि ये हड्डियां पूरी तरह स्वस्थ और बीमारी मुक्त होंगी. इस नए प्रकार के ढांचे से इस समस्या का समाधान हो सकेगा.

इस इम्प्लांट का सबसे ज्यादा फायदा फ्रैक्चर हुई हड्डियों में देखा जाएगा. हल्के फ्रैक्चर में हड्डी को दोबारा जोड़ने की कोशिश की जाती है. लेकिन जहां हड्डी पूरी तरह टूट जाए, वहां आम तौर पर यही विकल्प होता है कि या तो शरीर के किसी और अंग से हड्डी निकाल कर लगाई जाए, या उसकी जगह एक बनावटी हड्डी शरीर में डाल दी जाए. इसके अलावा हड्डी जैसे ही तत्व से बनी कृत्रिम वस्तु को टूटी हड्डी के बीच कुछ इस तरह से डाला जाता है कि टूटी हड्डी और उसके आसपास की कोशिकायों का दोबारा निर्माण हो सके.

इतावली वैज्ञानिकों के इस नए उपचार से यह सब और भी आसानी से हो सकेगा. लकड़ी से बने इन ढांचों से शरीर को किसी प्रकार की एलर्जी का कोई खतरा नहीं है. फिलहाल इसे सफलतापूर्वक टेस्ट तो कर लिया गया है, लेकिन आम आदमी की पहुंच में आते आते इसे अभी कुछ साल और लग सकते हैं.

रिपोर्टः ईशा भाटिया

संपादनः ए कुमार

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