1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

लंदन में नाटकघरों का सुनहरा युग

लंदन में नाटक और थियेटर की परंपरा का सुनहरा युग चल रहा है. देश के लीग फुटबॉल से तुलना की जाए तो लंदन के थियेटर हॉल में नाटक देखने ज्यादा लोग आते हैं.

सोसाइटी ऑफ लंदन थियेटर एंड नेशनल थियेटर की एक रिपोर्ट के अनुसार इस समय ब्रिटेन में थियेटर का स्वर्णयुग चल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, "हमें लगता है कि यह लंदन को दुनिया का सबसे बड़ा नाटक शहर बनाता है." 2012-2013 में करीब दो करोड़ 20 लाख लोग लंदन के नाटक घरों में कलाकारों को और नाटक देखने आए. यह एक साल पहले के मुकाबले 5.5 प्रतिशत ज्यादा था. इसके मुकाबले पिछले साल केवल एक करोड़ 40 लाख लोग देश में अत्यंत लोकप्रिय प्रीमियर लीग के फुटबॉल मैच देखने गए.

यही नहीं, सिनेमा हॉलों के मुकाबले भी नाटक घरों में भीड़ ज्यादा रहने लगी है. पिछले साल ब्रिटेन के नाटक घरों ने करीब एक अरब डॉलर कमाए जो राजधानी के सऊी सिनेमा हॉलों की कमाई से कहीं ज्यादा है. रिपोर्ट का कहना है कि इस समय लंदन थियेटर का सुनहरा युग चल रहा है.

लंदन का वेस्ट एंड थियेटर अपने नाटकों और गीतों से भरे म्यूजिकल्स के लिए जाना जाता है. यहां लायन किंग, ले मिजेराब्ले, बिली एलियट और वार हॉर्स जैसे नाटक ब्लॉकबस्टर की हैसियत रखते हैं. न्यू यॉर्क के ब्रॉडवे में भी ऑपेरा और नाटक दिखाए जाते हैं लेकिन वेस्ट एंड में ब्रॉडवे के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा लोग आते हैं.

ग्राहकों को एक अच्छा ड्रामा देखने के लिए करीब 28 पाउंड देने पड़ते हैं. यानी करीब 2,900 रूपये. लंदन में थियेटर को सरकार सबसिडी देती है और वहां काम कर रहे करीब 3,140 कलाकारों को बहुत कम पैसे मिलते हैं. लंदन में करीब 240 पेशेवर थियेटरों में एक लाख 10 हजार सीटें हैं. इनमें से ज्यादातर मुनाफा नहीं कमाने का दावा करती हैं. लंदन में छुट्टी बिता रहे लोगों में से कम से कम 25 प्रतिशत लोग नाटक देखने जाते हैं.

एमजी/एमजे(एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री