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दुनिया

रोहानी बदल सकते हैं बहुत कुछ

ईरान में नरमपंथी हसन रोहानी का राष्ट्रपति चुना जाना हैरान करने वाला तो है लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहे देश के लिए इसके मायने बड़े बदलाव वाले हो सकते हैं.

अत्यंत मुश्किल माने जाने वाले परमाणु मुद्दे पर बातचीत में भी समझौते के अपने खास हुनर के लिए हसन रोहानी को "शेख राजनयिक" कहा जाता है. नरमपंथी मौलवी रोहानी ने ईरान का चुनाव जीत कर अंततराष्ट्रीय बिरादरी की उम्मीदें बढ़ा दी है. रोहानी ने परमाणु गतिरोध को खत्म करने की शपथ ली है जिसके कारण पश्चिमी देशों ने ईरान को प्रतिबंधों में जकड़ रखा है. सुधारवादी राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी के शासन में वो जिन नीतियों पर चल रहे थे, 2005 में राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के जीतने के बाद उन पर रोक लग गई. नए राष्ट्रपति के साथ नहीं बनने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया. (ईरान पर विशेष)

विदेश नीति की विख्यात पत्रिका फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने लिखा है, "रोहानी की जीत ईरान में केवल सत्ता में बदलाव नहीं बल्कि पूरे खेल को बदलने वाला है." हालांकि, "सर्वोच्च नेता(अयातुल्लाह अली खमेनेइ) और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स सत्ता की सभी चाबियों पर अपना नियंत्रण रखेंगे." इसके साथ ही पत्रिका ने लिखा है कि रोहानी की जीत हो सकता है कि वॉशिंगटन का, "सुधारवादियों को मजबूत करने का नया रुख" देखे.

तेहरान 2006 से ही सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और जर्मनी की सदस्यता वाले गुट से अपने विवादित परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत कर रहा है लेकिन अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला है. ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ रोहानी के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बात कर चुके हैं. जैक स्ट्रॉ ने उन्हें बेहद "अनुभवी राजनयिक और राजनेता" बताया है. एक अखबार से बातचीत में स्ट्रॉ ने रोहानी की जीत पर कहा है, "डॉ रोहानी में लोगों का इतना बड़ा भरोसा ईरान के पिछले आत्मघाती रवैये के मिटने और पश्चिमी देशों के साथ ज्यादा रचनात्मक रिश्ते रखने की ख्वाहिश दिखाता है."

इस्रायल और पश्चिमी देशों के साथ अमेरिका भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का लक्ष्य हथियार विकसित करना मानता है लेकिन उसने भी रोहानी की जीत को "उम्मीद का अहम संकेत" कहा है. व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ डेनिस मैकडोनॉ ने कहा है, "अगर उनकी दिलचस्पी है...ईरान के रिश्ते बाकी दुनिया से बेहतर करने में तो इसका एक मौका है. अगह वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की शर्तों को मान कर अवैध परमाणु कार्यक्रम पर सफाई दे दें तो उनके लिए हम सहयोगी बन सकते हैं." अमेरिका ने भले ही उत्साह में भर कर कहा हो लेकिन दूसरे लोगों की प्रतिक्रिया थोड़ी सधी है. एक यूरोपीय राजनयिक ने नाम जाहिर ने करने की शर्त पर कहा, "हम बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे. कोई बुनियादी बदलाव नहीं आएगा लेकिन शायद तरीका बदल जाए."

वाशिंगटन के थिंक टैंक स्टीम्सन सेंटर से जुड़े ईरान के जानकार जेनेवीव आब्दो का कहना है कि परमाणु मुद्दे और सीरिया के शासक बशर अल असद के लिए ईरान के समर्थन में बहुत थोड़ा ही बदलाव आएगा. आब्दो का कहना है, "मुझे लगता है कि शुरुआत में हो सकता है कि हम कुछ अच्छा देखें क्योंकि यह ईरानी लोगों के काम का पुराना तरीका है. सत्ता के सामने घरेलू मुद्दे हैं, मुझे लगता है कि वो कोशिश करेंगे शायद इस नए राष्ट्रपति के साथ लोगों को खुश करने की जिसकी इस वक्त जरूरत है. लेकिन इसके बाद वही स्थिति फिर आ जाएगी."

रोहानी ने चुनाव प्रचार के दौरान सीरिया के मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं बढ़ाई लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि वो कई मामलों में सउदी अरब के साथ रहना चाहते हैं. सउदी अरब सीरिया में असद सरकार से लड़ रहे विद्रोहियों को समर्थन दे रहा है. सउदी के सुल्तान किंग अब्दुल्लाह ने हसन रोहानी को चुनाव में जीत पर बधाई दी है.

एनआर/एमजे (एएफपी)

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