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ब्लॉग

रोमांचक होगी अमेरिका में राजनीतिक घरानों की जंग

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनने की रेस शुरू हो गई है, हालांकि चुनाव 2016 में है. ग्रैहम लूकस का कहना है कि उम्मीदवारों की भीड़ में दो नाम प्रमुख हैं. डेमोक्रैटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन पार्टी के जेब बुश.

न तो हिलेरी क्लिंटन ने और न ही जेब बुश ने अपने अभियानों की सही शुरुआत की है. दोनों नर्वस और सलाहकारों द्वारा बहुत ज्यादा तैयार कराए गए दिख रहे हैं. निश्चित तौर पर रास्ता काफी लंबा है. पहले अमेरिका के दोनों प्रसिद्ध राजनीतिक परिवारों के प्रतिनिधियों को अपनी अपनी पार्टियों की उम्मीदवारी जीतनी है. पार्टी के अंदर विरोधियों को पछाड़ देने के बाद ही हम दो परिवारों के सीधे संघर्ष की बात कर पाएंगे. बुश परिवार ने दो-दो राष्ट्रपति दिए हैं जबकि क्लिंटन परिवार की ओर से एक राष्ट्रपति आया है. 1990 तक राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अत्यंत लोकप्रिय रहे हैं और निश्चित तौर पर हिलेरी के चुनाव अभियान में प्रमुख भूमिका निभाएंगे. लेकिन अफगानिस्तान और इराक युद्ध के जनक जॉर्ज डब्ल्यू बुश अत्यंत विवादास्पद हैं और जेब बुश के पिता जॉर्ज बुश को राष्ट्रपति से ज्यादा रोनाल्ड रेगन के उपराष्ट्रपति के रूप में याद किया जाता है. कम से कम उनके जेब बुश को नुकसान पहुंचाने की कम संभावना है.

वैसे नेता चुनते समय लोग बहुत पीछे नहीं देखते, वे अपनी जेब देखते हैं, क्षम बाजार में अपनी संभावना और अपने जीवन स्तर को देखते हैं. बिल क्लिंटन ने अपने सलाहकारों से 1992 के चुनाव प्रचार के दौरान यादगार बात कही थी, "ये अर्थव्यवस्था है साली." हिलेरी प्रभावशाली फर्स्ट लेडी थी और राष्ट्रपति बराक ओबामा की बहुत अच्छी विदेश मंत्री भी. लेकिन उन्होंने कभी सरकार का नेतृत्व नहीं किया है और न ही अर्थव्यवस्था की जरूरतों पर ध्यान दिया है. इस बात से भी ज्यादा मदद नहीं मिलेगी कि वे देश की पहली महिला शासक हो सकती हैं. 2008 में ओबामा के खिलाफ उम्मीदवारी की रेस में भी इससे मदद नहीं मिली थी.

कांटे की और रोमांचक रेस

हिलेरी क्लिंटन की समस्या यह भी है कि उनकी डेमोक्रैटिक पार्टी पिछले समय में बाएं की ओर झुकी है. चुनाव अभियान की शुरुआत पर उनकी पहली टिप्पणी दिखाती है कि उम्मीदवारी जीतने के लिए उनकी और बाएं की ओर जाने की योजना है. इसकी वजह समझ में आती है. चुनाव के बारे में हुए रिसर्च के अनुसार जो उम्मीदवार मौजूदा राष्ट्रपति के समर्थकों पर भरोसा करता है, उसे कम से कम 4 फीसदी वोटरों का नुकसान होता है. इसका मतलब यह है कि क्लिंटन को अपने समर्थकों का दायरा ओबामा के एफ्रो अमेरिकी, हिसपैनिक और लिबरल जैसे इंद्रधनुषी समर्थकों के बाहर फैलाना होगा. उन्हें ट्रेड यूनियनों की जरूरत है. इसीलिए उन्होंने ओबामा की ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप की नीति की आलोचना की है. वामपंथियों को लगता है कि इससे रोजगार कम होंगे. साथ ही क्लिंटन मध्यवर्ग को खोने का जोखिम नहीं उठा सकती, क्योंकि चुनाव उन्हीं की बदौलत जीते जाते हैं.

दूसरी ओर जेब बुश 1999 से 2007 तक फ्लोरिडा के अत्यंत कामयाब गवर्नर रहे हैं. इस अवधि में उन्होंने आर्थिक मजबूती के लिए काम किया और शिक्षा सुधारों पर ध्यान दिया. उन्होंने जॉर्ज डब्ल्यू बुश के राष्ट्रपति दफ्तर से दूरी बनाए रखी. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने परिवार से दूरी नहीं बनाई और चुनाव अभियान की शुरुआत पर अपने माता-पिता को बुलाना नहीं भूले. इन सब से बढ़कर वे अकेले रिपब्लिकन उम्मीदवार लगते हैं जो हिलेरी क्लिंटन पर संदेह करने वाले राजनीतिक मध्य के मतदाताओं को लुभा सकता है. अभी दोनों ही उम्मीदवारों को लंबा रास्ता तय करना है लेकिन पश्चिमी देशों के नेतृत्व की रेस कांटे की और रोमांचक होने वाली है.

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