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जर्मन चुनाव

रोड से रोजगार पैदा करेंगे ओबामा

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अगले छह साल में 50 अरब डॉलर के खर्चे से रोजगार पैदा करने के अभियान का एलान किया. नौकरी पैदा करने के लिए सड़क, रेल लाइन और हवाई पट्टियां बनवाएंगे राष्ट्पति.

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अमेरिका में रोजगार पैदा करने के लिए ओबामा ने कहा है," हम 1,50,000 मील लंबी सड़कों को फिर से बनवाएंगे, इनसे पूरी दुनिया का छह बार चक्कर लग सकता है, 4000 मील लंबी रेल लाइन बिछाएंगे और उनकी देखभाल करेंगे. इन रेललाइनों का फैलाव एक तट से दूसरे तट तक होगा." ओबामा ने मजदूरों की एक रैली को संबोधित करते हुए देश में नौकरी पैदा करने के लिए अपने अभियान का एलान किया. हजारों लोगों की भीड़ ने ओबामा के इस एलान का शोर मचाकर स्वागत किया. खासतौर से ओबामा के यह कहने पर कि अमेरिका मध्यवर्ग के मजबूत हुए बगैर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं बन सकती लोग खुशी से झूम उठे.

Obama / Oval Office / Rede an die Nation

हर लम्हा संघर्ष करेंगे ओबामा

ओबामा ने कहा," अर्थव्यवस्था की दशा पलटने के लिए मैं हर दिन, हर घंटे और हर मिनट संघर्ष करुंगा." ओबामा अमेरिका को ये बताने में जुटे हैं कि उनकी आर्थिक नीति काम कर रही है. बुनियादी ढांचे के विकास की उनकी योजना अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशों का हिस्सा है जिसका एलान वो इसी हफ्ते करने वाले हैं.

ओबामा की पार्टी के नेताओं को नवंबर में होने वाले संसदीय चुनावों में अमेरिकी मंदी से न उबर पाने का डर सता रहा है. ओबामा पर दबाव है कि वो देश में नौकरियां पैदा करें और बेरोजगारी की दर को 9.6 के ऊंचे स्तर से नीचे लाएं. वो भी ऐसे हालात में जब आर्थिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि राष्ट्रपति के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं.

ओबामा की योजना में एक टैक्स छूट का प्रस्ताव भी है जो बिजनेस के रिसर्च और विकास कार्यक्रमों पर लगाया जाना है. निवेशक इस प्रस्ताव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस छूट से सरकार पर अगले 10 सालों में 100 अरब डॉलर का बोझ बढ़ेगा.

हालांकि ओबामा के सुझाए उपायों पर आर्थिक जानकार संदेह जता रहे हैं. उनके मुताबिक बुनियादी ढांचे में किया गया खर्च अर्थव्यवस्था को तुरंत पटरी पर ले आएगा ये कहना मुश्किल है. ओबामा का कहना है कि इससे तुरंत नौकरियां पैदा होंगी जबकि ओबामा प्रशासन के ही एक बड़े अधिकारी ने माना है कि इन रास्तों पर चलने के बावजूद पहले आदमी को नौकरी अगले साल ही मिल पाएगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः ओ सिंह

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