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विज्ञान

रेस ट्रैक पर नेत्रहीन ड्राइवर का फर्राटा

विज्ञान और तकनीक एक नए चमत्कार को साबित करने के मुहाने पर हैं. शनिवार को पहली बार अमेरिका में एक नेत्रहीन शख्स रेस ट्रैक पर गाड़ी चलाएगा. गाड़ी और नेत्रहीन व्यक्ति को नॉन विजुअल टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाएगा.

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पैदाइशी नेत्रहीन मार्क रिकोबोनो तीन साल से वर्जीनियाटेक यूनिवर्सिटी और टॉर्क टेक्नोलॉजी के छात्रों का प्रयोग हिस्सा है. प्रयोग के तहत नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए नॉन विजुअल टेक्नोलॉजी बनाई जा रही है, ताकि कंप्यूटर प्रोग्राम और अपनी बाकी इंद्रियों की मदद से नेत्रहीन व्यक्ति रोजर्मरा के काम कर सकें.

लेबोरेट्री में की गई तीन साल की मेहनत के बाद अब असल प्रयोग की बारी है. शनिवार को रिकोबोनो फोर्ड एस्कैप हाईब्रिड कार की ड्राइविंग सीट पर बैठेंगे. उनके सामने फ्लोरिडा के डैटोना इंटरनेशनल स्पीडवे का घुमावदार रेस ट्रैक और कुछ अड़चनें होंगी. 'नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड' ने कार को खास ढंग से बनाया है. कार में सड़क और सामने आने वाली चीजों को भांपने वाले सेंसर लगे हैं. ड्राइविंग को दौरान सेंसर रिकोबोनो को सड़क और दुविधाओं की पूरी जानकारी देंगे. कंप्यूटर प्रोग्राम उन्हें इस बात की जानकारी भी देगा की कब मोड़ कितना काटना है और ब्रेक कितनी देर और कितनी जोर से दबाना है.

रिकोबोनो के ड्राइविंग टेस्ट के दौरान सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा. कार का कंट्रोल अन्य लोगों को हाथ में भी रहेगा. यदि कहीं पर गड़बड़ हुई तो कार को टकराने से पहले ही रोका जा सकेगा.

टेस्ट ड्राइव को लेकर अमेरिकी विश्वविद्यालय और नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड खासे उत्साहित हैं. परीक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि नेत्रहीन व्यक्तियों की अन्य इंद्रियां आम लोगों से कहीं ज्यादा तेज होती हैं. अगर इन्हीं का विज्ञान के साथ बेहतर ढंग से तालमेल बैठाया जाए तो नेत्रहीनों की दुनिया बदल सकती है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: ए जमाल

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