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दुनिया

रेसलिंग पर हो सकता है विद्रोह

कुश्ती के चक्कर में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति पटखनी खा सकता है.सितंबर में ब्युनस आयर्स में होने वाली अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सम्मेलन में अंतिम फैसला कुश्ती को ओलंपिक में रखे रहने के पक्ष में हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की कार्यकारिणी ने रेसलिंग को ओलंपिक खेलों से हटाने का फैसला लिया है, लेकिन इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर समिति की आम सभा में लगेगी. आईओसी के सदस्य इस बात से नाराज हैं कि सवा सौ साल से ज्यादा से ओलंपिक खेलों का हिस्सा रहे इस खेल को हटाने का फैसला 15 सदस्यों वाले कार्यकारी बोर्ड ने लिया है. प्राचीन काल से आधुनिक ओलंपिक में आए रेसलिंग को निकालने की प्रतिक्रिया में 7 से 10 सितंबर तक होने वाली कांग्रेस में गुस्सा उबल कर सामने आने के संकेत हैं.

आईओसी के अध्यक्ष जाक रोगे के 12 साल के कार्यकाल पर इस विवाद का साया पड़ सकता है, जबकि बहुत से आईओसी सदस्यों का कहना है कि इस विवाद से बचा जा सकता था. रेसलिंग को निकाले जाने के फैसले पर हुए हंगामे के बाद मई में होने वाली कार्यकारी बोर्ड की अगली बैठक में यह तय होगा कि रेसलिंग सहित तीन खेलों को फैसले के लिए कांग्रेस के सामने रखा जाएगा. ब्युनस आयर्स की कांग्रेस में 2020 के ग्रीष्मकालीन खेलों के मेजबान के अलावा जाक रोगे के उत्तराधिकारी के बारे में भी फैसला होगा.

रेसलिंग के भविष्य पर जो हंगामा हो रहा है, वह 2009 में बेसबॉल और सॉफ्टबॉल को हटाए जाने के फैसले पर हुई प्रतिक्रिया से एकदम अलग है. उस समय उन्हें हटाकर व्यावसायिक रूप से ज्यादा आकर्षक गोल्फ और रग्बी को ओलंपिक में शामिल किया गया था. लेकिन इस बार ओलंपिक में शामिल होने की तैयारी कर रहे उम्मीदवार खेल उतने ग्लैमर वाले नहीं हैं. बेसबॉल और सॉफ्टबॉल मिलजुलकर फिर से ओलंपिक में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बहुत से लोगों का मानना है कि रेसलिंग ओलंपिक खेलों से जुड़े अपने अतीत के कारण ओलंपिक आंदोलन का हिस्सा है.

आईओसी के एक सदस्य का कहना है कि रेसलिंग की समस्या यह है कि उनका कोई भी प्रतिनिधि ओईओसी में नहीं है, इसलिए जब गुटबाजी की बात आती है तो उनके लिए लड़ने वाला कोई नहीं है. रेसलिंग को हटाने का फैसला इसलिए आसानी से लिया जा सका कि कार्यकारी बोर्ड के सदस्य कम से कम किसी आईओसी सदस्य को तकलीफ नहीं पहुंचा रहे थे. लेकिन सितंबर में ओलंपिक मेजबान का फैसला होगा. रेस में मैड्रिड के अलावा इस्तांबुल और टोक्यो भी हैं. दोनों ही जगहों पर रेसलिंग की लंबी परंपरा है और वे रेसलिंग को निकाले जाने के फैसले से कतई खुश नहीं हैं.

तुर्क रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष हमजा येरलिकाया ने नाराज होकर कहा है, "2020 में रेसलिंग के बिना इस्तांबुल ओलंपिक खेलों के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. हम ऐसा नहीं होने देंगे." अंत में रेसलिंग का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि 2020 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी कौन करता है. टोक्यो और इस्तांबुल के पक्ष में फैसला उसके मौके को निश्चित तौर पर बेहतर बनाएगा.

इस बीच सदस्य देशों में रोगे के फैसले के खिलाफ विरोध का झंडा बुलंद होने लगा है. ईरान ने फैसले को गंभीर बताते हुए उम्मीद जताई है कि वह विश्व के प्रमुख देशों के साथ इस पुराने खेल को ओलंपिक से निकाले जाने को रोकने के प्रयासों में शामिल होगा. ग्रीस का रेसलिंग संघ भी इस फैसले का विरोध कर रहा है. ग्रीक ओलंपिक संघ ने उसे पूरा समर्थन देने की घोषणा की है. जर्मनी में भी रेसलिंग के खिलाड़ियों ने आईओसी के फैसले पर नाराजगी जताई है और आयोजन के व्यावसायीकरण का आरोप लगाया है.

भारत की सरकार ओलंपिक में रेसलिंग को बनाए रखने के लिए उन दूसरे देशों की मदद लेगी जहां रेसलिंग लोकप्रिय है. भारत ने रेसलिंग में चार ओलंपिक पदक जीते हैं. भारत सरकार ने आईओसी के फैसले को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और सदमे वाला बताया है. भारतीय खेल मंत्रालय ने कहा है कि रेसलिंग भारत में ही नहीं, रूस, ईरान, मंगोलिया, जापान और चीन में लोकप्रिय खेल है. इसे ओलंपिक से निकालने खिलाड़ियों को हतोत्साहित करेगा और भविष्य में खेल के अस्तित्व को बुरी तरह प्रभावित करेगा.

एमजे/ओएसजे (डीपीए, रॉयटर्स, एएफपी)

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