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दुनिया

रेप से पैदा बच्चों पर अदालत का अहम फैसला

बलात्कार की वजह से पैदा हुए एक बच्चे के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बच्चे की हैसियत पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी सरकार की होगी और जैविक पिता की संपत्ति पर भी उसका अधिकार होगा.

"सभी सवालों के जवाब अदालतों से तय नहीं होते, न्यायालयों की भी अपनी सीमाएं हैं. समाज में कुछ समस्याएं हैं...मुददे हैं...इनका जवाब केवल समाज के पास है, यह समाज को ही तय करना है कि वह दुराचार पीडि़ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहता है, न्यायालय ने अपनी सीमाओं में अपनी भूमिका निभा ली. अब उन लोगों की बारी है, जो न्यायालय से न्याय की आशा करते हैं. उनके प्रेम और स्नेह से न केवल दो जिंदगियां बच सकती हैं बल्कि उन्हें समाज में दो नकारात्मक व्यक्तित्व बनने से भी रोक सकती हैं."

यूपी की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी की एक 13 साल की नाबालिग बच्ची के साथ हुए रेप से पैदा हुई बच्ची और पीड़िता के भविष्य पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के मार्मिक फैसले की यह पंक्तियां लोगों को झकझोर गईं. इस फैसले में न्यायाधीश शबीहुल हसनैन और न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने यह भी कहा, "याद रखिए कि ऐसी त्रासदी के लिए पीड़ित को कभी दोष नहीं दिया जा सकता, यह त्रासदी किसी भी परिवार के साथ घट सकती है."

मार्मिक अपील का असर

आम तौर पर कोर्ट के फैसलों को कठोर और भावना शून्य माना जाता है, कहा जाता है कानून अंधा होता है, लेकिन इस फैसले ने कानून की व्याख्या करने वालों की जुबान बंद कर दी है. इस फैसले का असर यह हुआ है कि अस्पताल में पीड़िता के बेड के आस पास भीड़ जमा होने लगी है और उसकी मां से हर कोई कहने लगा है कि उसका मुंह तुम क्यों ढके हो, उसकी गलती क्या है. इतना ही नहीं उसकी बेटी को गोद लेने वालों के भी फोन कम नहीं आ रहे हैं. समाजसेवी ताहिरा हसन कहती हैं कि कोर्ट की उस मार्मिक अपील पर समाज उठ खड़ा हुआ है.

लेकिन उस मासूम का दर्द कम नहीं हो रहा है और वह आज भी अकारण दर्द से गुजर रही है जिसकी मां भी उसका चेहरा खुला रखना नहीं चाह रही है. 17 फरवरी को उसके साथ बलात्कार हुआ, उसके पिता ने अबार्शन कराना चाहा लेकिन डाक्टरों ने इनकार कर दिया क्योंकि उसकी सेहत इस लायक नहीं थी. मात्र 30 किलो वजन की पीड़िता के पिता ने हाई कोर्ट का रुख किया तो हाई कोर्ट ने भी अबार्शन पर कोई राय नहीं दी, उसे लखनऊ के क्वीन मैरी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करा दिया जहां उसने 26 अक्टूबर को एक बेटी को जन्म दिया. उसके बाद फिर से बहस हुई कि इस बेटी का क्या होगा और तब कोर्ट ने तीन नवंबर को यह ऐतिहासिक फैसला किया जिसमें सरकार को इस मामले पर अलग अलग पहलुओं पर अध्ययन कराने का भी आदेश दिया गया है.

दूरगामी नतीजे

शादी के बाहर पैदा होने वाले बच्चे के भविष्य को लेकर अदालत का फैसला दूरगामी नतीजे वाला है. हाई कोर्ट ने नाबालिग रेप पीड़िता की देखभाल के अलावा बच्चे की विरासत पर भी फैसला सुनाया है और कहा कि बायोलॉजिकल पिता की सम्पत्ति में भी बच्चे का अधिकार होगा. पीड़िता को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद और बालिग होने पर सरकारी नौकरी देने का भी आदेश राज्य सरकार को दिया गया है. इसके अलावा हाई कोर्ट ने नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी भी यूपी सरकार को सौंप दी है. अदालत ने कहा कि इसके रेप का मुल्जिम भी नाबालिग है और वह भी जेल में है. कोर्ट ने कहा है कि चूंकि अभी अभियुक्त पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ है इसलिए मुल्जिम की सम्पत्ति में अधिकार का आदेश अभी नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा भी कोर्ट ने दोनों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई निर्देश दिए हैं.

लेकिन दूसरी तरफ पीड़िता के परिवार को बराबर धमकियां मिल रही हैं कि उसकी बहनों के साथ भी बलात्कार किया जाएगा. पीड़िता के पिता को पुलिस संरक्षण नहीं मिल सका है और पुलिस के रवैय्ये से वह क्षुब्ध है.

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