1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

रेडिएशन से रक्षा चेर्नोबिल की सबसे बड़ी चुनौती

यूक्रेन में चेर्नोबिल परमाणु हादसे की 30वीं वर्षगांठ पर मृतकों और पीड़ितों की याद में स्मारक सभाएं हुईं. दाता देशों ने परमाणु दुर्घटना की जगह को आने वाली पीड़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सहायता का वचन दिया.

26 अप्रील 1986 को उस समय के सोवियत यूक्रेन में रिएक्टर नंबर चार में सिस्टम टेस्ट के दौरान हुई गड़बड़ी के कारण परमाणु रिएक्टर में दुर्घटना हो गई. उसके बाद हुए कई धमाकों के बाद रेडियोधर्मी विकिरण बाहर निकल आया और हजारों लोगों को उनके घरों से हटाना पड़ा. दुर्घटनाग्रस्त रिएक्टर की सफाई करने और उसे कंक्रीट के खोल से ढकने के काम में करीब 600,000 सोवियत कामगारों को लगाया गया था. उनमें से बहुत से विकिरण के शिकार हो गए. हादसे में कितने लोगों की जान गई इस पर अभी भी विवाद है.

चेर्नोबिल को सुरक्षित रखने में यूक्रेन की मदद के लिए दाता देशों ने 8.75 करोड़ यूरो की मदद का आश्वासन दिया है. इससे परमाणु कचरे का स्टोर बनाया जाएगा. यूक्रेन को भूमिगत स्टोर बनाने के लिए अभी और डेढ़ करोड़ यूरो का इंतजाम करना होगा ताकि वह इस साल के अंत तक धातु के डब्बों में खतरनाक परमाणु कचरे को सुरक्षित ढंग से रख सके. यूरोपीय पुनर्निमाण और विकास बैंक ईबीआरडी की प्रमुख सूमा चक्रवर्ती का कहना है कि यह यूक्रेन के साथ साथ दुनिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है.

आज भी बना हुआ है खतरा

चेर्नोबिल के परमाणु बिजलीघर के चार रिएक्टरों में से एक में 26 अप्रील 1986 को हुए हादसे के बावजूद बाकी तीन रिएक्टरों में अगले 16 साल तक बिजली बनना और परमाणु कचरा पैदा होना जारी रहा. दुर्घटनाग्रस्त रिएक्टर नंबर चार में अभी भी 200 टन यूरेनियम रखा है जिसकी वजह से यह आशंका है कि पुराने पड़ते कंक्रीट के खोल के टूटने से और रेडियोधर्मी विकिरण बाहर निकल सकती है. दुर्घटनाग्रस्त रिएक्टर को ढकने के लिए 2010 से स्टील का एक 25,000 टन भारी सुरक्षा खोल बनाया जा रहा है जो अगले साल तक बनकर तैयार हो जाएगा और दुर्घटना की जगह को ढक देगा. स्टील के इस खोल को बनाने पर 2.1 अरब यूरो का खर्च आया है. इस पैसे का तो इंतजाम हो गया है लेकिन यह साफ नहीं है कि इसके रखरखाव का खर्च कौन उठाएगा.

परमाणु हादसे की तीन दशक बाद भी इस बात पर गहरे विवाद हैं कि हादसे की वजह से निकलने वाले विकिरण से कितने लोगों की जान गईं. उस समय के सोवियत अधिकारियों ने कई हफ्तों तक हादसे के पैमाने को छुपाने की कोशिश की और बचाव कर्मियों को बिना किसी अतिरिक्त सुरक्षा के उस इलाके में भेजा. 2005 में प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार चेर्नोबिल हादसे के प्रभाव के कारण यूक्रेन के अलावा पड़ोसी रूस और बेलारूस में 4000 लोगों की जान जाने का अनुमान है. पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस ने इन आंकड़ों को गंभीर रूप से कमतर आंका गया आंकड़ा बताया. संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक समिति ने औपचारिक रूप से 30 मौतों को मान्यता दी जिनमें दुर्घटना के बाद बचाव के लिए भेजे गए लोग भी शामिल थे.

एमजे/आईबी (एएफपी, डीपीए)

DW.COM

संबंधित सामग्री