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दुनिया

रूस से रिहाई मांगता ग्रीनपीस

ग्रीनपीस के गिरफ्तार सदस्यों के खिलाफ रूसी जांच कमेटी के आरोप वापस लेने के बाद उनकी रिहाई की मांग ने जोर पकड़ लिया है. ग्रीनपीस ने रूस से माफी मांगने को भी कहा है.

अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्रीनपीस ने रूस की सरकार से मांग की है कि उसके क्रू सदस्यों को छोड़ दिया जाए. जांच अधिकारियों ने उनके खिलाफ लूटमार या गुंडागर्दी के आरोप हटा लिए हैं. इन लोगों ने आर्कटिक महासागर में एक ऑयल प्लेटफॉर्म पर विरोध प्रदर्शन किया था. ग्रीनपीस के वकील एन्टॉन बेनेस्लाव्सकी ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "इस मामले में हमारे रुख में बदलाव नहीं आया है, इस हास्यास्पद मामले की जांच बंद हो, मांफी मांगी जाए और सबको छोड़ दिया जाए."

रूस में गंभीर अपराधों की जांच करने वाली ताकतवर जांच कमेटी ने बुधवार देर शाम यह एलान किया कि वह ग्रीनपीस के 30 सदस्यों के खिलाफ लगे आरोपों को हल्का करने जा रही है. संगठित गुट के जरिए लूट के मामले में अधिकतम 15 साल की कैद और गुंडागर्दी के आरोप में सात साल की कैद हो सकती है.

ग्रीनपीस के यह कार्यकर्ता 18 अलग अलग देशों के हैं और विरोध के अभियान पर डच जहाज से जा रहे थे. इनकी गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में तो हलचल मचाई ही, नीदरलैंड्स को रूसी सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने पर भी विवश कर दिया. हालांकि बुधवार को रूस ने कहा कि वह समुद्री अदालत की सुनवाई से बाहर रहेगा. नीदरलैंड इस सुनवाई के जरिए अपने जहाज और चालक दल के सदस्यों को रिहा करवाने की तैयारी में है.

ग्रीनपीस के वकील बेनेस्लाव्सकी का कहना है कि इंटरनेशनल ट्राइब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ सी यानी समुद्री अदालत में सुनवाई पर आरोपों के बदले जाने से कोई असर नहीं पड़ेगा. उनका कहना है, "अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल में सुनवाई का आधार रूस के हाथों जहाज का पकड़ा जाना है. जहाज पकड़ने वाले अपनी कार्रवाई को किस तरह उचित ठहराते हैं इससे मामले के न्याय क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़ता."

गुंडागर्दी के नए आरोप बिल्कुल वही हैं जो पुसी रॉयट पंक बैंड के खिलाफ लगाए गए थे. इस म्यूजिकल बैंड ने अपने दो सदस्यों को दो साल के लिए जेल में डालने पर राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के खिलाफ विरोध जताने के लिए मॉस्को की एक चर्च के सामने संगीत कार्यक्रम किया था. ग्रीनपीस के जहाज के सदस्यों में दो पत्रकार भी हैं. इन सबको उत्तरी मुरमान्स्क क्षेत्र में रखा गया है. दो कार्यकर्ताओं ने सरकारी कंपनी के तेल प्लेटफॉर्म पर खड़े हो कर आर्कटिक क्षेत्र में ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल का विरोध किया था. ग्रीनपीस के प्रतिनिधियों और विश्लेषकों का मानना है कि रूसी राष्ट्रपति के यह कहने के बाद ही अभियोजकों ने आरोप हटाए हैं कि कार्यकर्ता, "जाहिर है कि लुटेरे नहीं हैं."

एनआर/एमजे (एएफपी)

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