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दुनिया

रूस रुका नहीं तो 'गलती महंगी पड़ेगी'

रूस के तीसरे सबसे बड़े बैंक ने यूक्रेन के साथ तनावों के बीच करीब सात अरब डॉलर विदेशी बैंकों से रूस के सेंट्रल बैंक में ट्रांसफर कर लिए हैं. उधर अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने रूस को चेतावनी दी है.

पूर्वी यूक्रेन में बढ़ते तनाव के बीच जॉन केरी ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा, "रूसी सैनिकों की यूक्रेन की सीमा तक चल रही खतरनाक गतिविधि को देखने के बाद मैं साफ साफ कहना चाहता हूं, अगर रूस इसी दिशा में आगे बढ़ता है तो यह सिर्फ गंभीर गलती ही नहीं होगी, यह बहुत महंगी गलती होगी."

उधर यूक्रेन की सेना ने पांच रूसी समर्थक अलगाववादियों को मार दिया. इसके जवाब में रूसी सेना ने यूक्रेन की सीमा के पास सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है. और इसी के साथ आशंका पैदा हो गई है कि रूस यूक्रेन पर हमला कर सकता है. पहली बार ऐसा हुआ है कि यूक्रेन ने विद्रोहियों से निबटने के लिए सेना का इस्तेमाल किया है. विद्रोहियों ने पूर्वी यूक्रेन के कई शहरों पर कब्जा कर रखा है. छह अप्रैल से पूर्वी यूक्रेन में अस्थिरता जारी है और विद्रोही सरकारी इमारतों सहित कई इलाकों पर कब्जा कर आजाद पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ डोनेस्क बनाने का दावा कर रहे हैं.

यूक्रेन और अमेरिका का आरोप है कि रूस इस अस्थिरता को प्रायोजित कर रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा, "बदलाव के लिए खुली खिड़की बंद हो रही है." साथ ही उन्होंने एक बार फिर कहा कि अगर रूस अपनी नीतियां नहीं बदलता तो वॉशिंगटन उस पर प्रतिबंध लगाने को मजबूर हो जाएगा. इतना ही नहीं कड़े शब्दों में केरी ने कहा कि रूस पूर्वी यूक्रेन को ऐसे समय अस्थिर बना रहा है जब देश में अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि प्रतिबंध असम्मानजनक हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खत्म करने वाले हैं लेकिन रूस को इससे होने वाला नुकसान ज्यादा नहीं. रूस हमेशा से कहता रहा है कि रूसी भाषी लोगों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करना उसका अधिकार है. और इसी कारण उसने यूक्रेन की सीमा के नजदीक करीब 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं.

पिछले ही महीने एक जनमत संग्रह के बाद यूक्रेन का स्वायत्त इलाका क्रीमिया रूस में शामिल हो गया. लेकिन यूक्रेन के औद्योगिक पूर्वी हिस्से में रूसी सेना का पहुंचना बहुत गंभीर घटना हो जाएगी और दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा भी साबित हो सकती है. आर्थिक और वित्तीय संकट से निकल रही दुनिया के सामने एक और संकट खड़ा हो सकता है. इसका पहला असर ये दिखाई दे रहा है कि यूक्रेन संकट के मद्देनजर तेल की कीमतों में उछाल देखा गया.

उधर मॉस्को ने संकेत दिए हैं कि जो विदेशी कंपनियां इस समय प्रतिबंधों के कारण देश छोड़ कर जाएंगी उनके फिर से वापस लौटना मुश्किल होगा. उधर रूसी गैस कंपनी गाजप्रोम ने कीव पर और 11.4 अरब डॉलर का अतिरिक्त बिल भेज दिया है, जो पिछले महीनों में कम ली गई गैस का हर्जाना है. यूक्रेन कोशिश कर रहा है कि रूस से गैस बंद होने की स्थिति में यूरोप से उसे गैस मिल सके.

अभी तक अमेरिका और यूरोपीय संघ ने मॉस्को के खिलाफ हल्के दंडात्मक कदम उठाए हैं. इसके तहत वीजा प्रतिबंध और कुछ रूसियों की संपत्ति पर रोक शामिल है. जेनेवा समझौते के हिसाब से कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में अमेरिका और यूरोपीय संघ, दोनों ही रूस पर गंभीर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रहे हैं. अमेरिका हालांकि इस बात से भी परेशान है कि कुछ यूरोपीय देश रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का कदम नहीं उठाना चाहते. ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद और जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल के साथ इटली के प्रधानमंत्री मातेओ रेंसी के साथ ओबामा शुक्रवार को बातचीत कर सकते हैं.

उधर प्रतिबंधों का असर पश्चिमी कंपनियों पर भी दिखने लगा है. दुनिया की सबसे बड़ी क्रेडिट कार्ड कंपनी वीसा को ओबामा के प्रतिबंधों का नुकसान हो रहा है. कंपनी के फाइनैंस डाइरेक्टर बायरन पोलिट ने इस तिमाही का अकाउंट पेश करते हुए कहा, "हम अमेरिका और रूस की राजनीति के शिकार हो गए हैं." इसके बाद वीसा के शेयर पांच फीसदी गिर गए. प्रतिबंधों के कारण वासा और मास्टरकार्ड ने रूस के दो प्रमुख बैंकों के साथ सहयोग रोक दिया था. रूस ने इसके बाद अपना खुद का क्रेडिट कार्ड शुरू करने की धमकी दी है.
एएम/एमजे (रॉयटर्स)

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