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मनोरंजन

रूस में मनाया गया हिंदी दिवस

रूस की राजधानी मॉस्को में हिंदी सीखने और सिखाने वाले भारतीय और रूसी लोगों ने मिलकर रविवार को हिंदी दिवस समारोह मनाया. रूसी छात्रों की लिखी हिंदी कविताओँ ने समारोह में रंग जमा दिया.

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हिंदी सीखने वाले छात्रों की कविताएं सुनकर समारोह में आए भारतीय राजदूत प्रभात प्रकाश शुक्ला भी दंग रह गए. जवाहर लाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया. केंद्र के हिंदी प्रोफेसर शिशिर पाण्डेय ने बताया कि रूसी छात्र बड़े उत्साह से हिंदी सीख रहे हैं और उन्हें इसमें खूब मजा भी आ रहा है.

प्रोफेसर ने बताया कि हिंदी और रूसी भाषा में हजारों शब्द ऐसे हैं जिनके अर्थ एक जैसे हैं. इसके अलावा रूसी भाषा का व्याकरण संस्कृत व्याकरण जैसा है. हिंदी सिखाने वाली रूसी प्रोफेसर स्वेतलाना मिकोया ने तो ऐसे कुछ शब्द भी बताए. हिन्दी में सोने के लिए और रूसी में स्वप्न के लिए एक ही शब्द है सोना, इसी तरह हिंदी प्रसार और रूसी में प्रोस्तार एक जैसे मतलब देते हैं.

रूसी राजधानी के कई संस्थानों में हिंदी पढ़ाई जाती है इनमें मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ एशियन एंड अफ्रीकन स्टडीज, मास्को इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन, रशियन ह्युमैनिटीज यूनिवर्सिटी और स्कूल नंबर 19. जवाहर लाल नेहरू सांस्कृतिक संस्थान हिंदी में सर्टिफिकेट कोर्स कराता है. जबकि यूनिवर्सिटी के संस्थान डिग्री कोर्स की पढ़ाई भी कराते हैं.

मॉस्को यूनिवर्सिटी के डॉ लुडमिला खोखलोवा याद करते हैं कि 50 साल पहले जब हिंदी से जुड़े कोर्स शुरु किए गए तो बहुत कम सुविधाएं थीं. खोखलोवा मानते हैं कि इंटरनेट और दूसरे ऑडियो विजुअल माध्यमों के कारण आज के छात्र कम समय में अच्छी हिंदी सीख रहे हैं.

उस समय के तो शिक्षकों को भी हिंदी सीखने के लिए भारत जाना पड़ता था. मॉस्को में रहने वाले पद्मश्री से सम्मानित मशहूर कवि और अनुवादक डॉ मदनलाल मधु मानते हैं कि हिंदी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनना होगा तभी ये दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी भाषा बना पाएगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एस गौड़

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