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दुनिया

रूस क्रीमिया में सुधारे मानवाधिकारों का हाल: यूएन

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने एक प्रस्ताव पास कर रूसी कब्जे वाले क्रीमिया में मानवाधिकार पर्यवेक्षकों को जाने की अनुमति देने और वहां स्थानीय लोगों के अधिकारों के हनन को रोकने की अपील की है.

संयुक्त राष्ट्र आम सभा की मानवाधिकार समिति ने यूक्रेन के उस प्रस्ताव को पास किया है जिसमें क्रीमिया में रूस द्वारा "मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार किए जाने और सभी भेदभावपूर्ण कानूनों को रद्द करने" की अपील है. इस कदम से पता चलता है कि संयुक्त राष्ट्र यूक्रेन की क्रीमिया पर संप्रभुता का समर्थन करता है. प्रस्ताव में रूस से अपील की गई है कि वो तुरंत क्रीमिया में मनवाधिकारों के हनन को रोकने की कार्रवाई करे.

रूस ने मार्च 2014 में क्रीमिया को यूक्रेन से अलग कर दिया था. महीनों तक चले  विरोध प्रदर्शनों के कारण यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को पद से हटना पड़ा था. वे रूस के करीबी माने जाते थे. लेकिन इसके बाद भी रूस-समर्थक अलगाववादियों ने पूर्वी यूक्रेन में हिंसक आंदोलन जारी रखा.

रूस ने यूक्रेन ने इस प्रस्ताव को रद्द करने की अपील की थी. रूस ने इसे "राजनीति से प्रेरित" कदम बताया. चीन, भारत, ईरान, भारत, सीरिया, दक्षिण अफ्रीका, कजाखस्तान, सर्बिया और उत्तर कोरिया ने भी इस मांग में रूस का साथ दिया. लेकिन यूएन में इस प्रस्ताव को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के समर्थन के कारण मंजूरी मिल गई. इस प्रस्ताव को अगले महीने महासभा के कुल 193 सदस्यों के सम्मेलन में वोटिंग के बाद आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकता है.

मानवाधिकार संगठन क्रीमिया के मुस्लिम तातार समुदाय पर अत्याचार के सवाल उठाते रहे हैं. प्रस्ताव में इस तरह के जातीय समुदायों से भेदभाव बरते जाने की निंदा की है. यूक्रेन के उप विदेश मंत्री सर्गेई किस्लितिस्या ने यूएन समिति से कहा कि इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य "एक कब्जाधारी शक्ति के रूप में रूस से अपनी जिम्मेदारी निभाने" को प्रेरित करना है. 2014 में मानवाधिकार पर बनाए गए यूएन मॉनिटरिंग मिशन को अब तक क्रीमिया में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है.

आरपी/एके (एएफपी,एपी)

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