रूस की ऊर्जा और हथियारों पर ईयू की रोक | दुनिया | DW | 12.09.2014
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दुनिया

रूस की ऊर्जा और हथियारों पर ईयू की रोक

ऊर्जा और हथियार निर्माता कंपनियों को लक्षित कर यूरोपीय संघ ने रूस पर तीसरे दौर के प्रतिबंध लगा दिए हैं. उधर यूरो जोन के देशों की आर्थिक स्थिति पर बातचीत के लिए ईयू के वित्त मंत्रियों की शुक्रवार से बैठक हो रही है.

पहले के प्रतिबंधों की तरह ही यह रोक भी रूस के यूक्रेन विवाद में शामिल होने की कथित रिपोर्टों के आधार पर लगाई गई हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने नए प्रतिबंधों का स्वागत करते हुए कहा कि ये कदम उनके देश के साथ यूरोपीय एकता का सबूत हैं. उन्होंने कहा कि क्रीमिया, जिसे रूस ने अपने में मिला लिया है, उसे फिर से यूक्रेन का हिस्सा बनाना चाहिए. पोरोशेंको ने कहा, "क्रीमिया फिर से हमारा होगा, जरूरी नहीं कि सैन्य कार्रवाई से ही हो."

यूरोपीय संघ के नए प्रतिबंध रूस की हथियार निर्माता कंपनियों और ऊर्जा कंपनियों को जाने वाला यूरोपीय धन रोक देंगे. इससे गासप्रोम, रोसनेफ्ट, ट्रांसनेफ्ट जैसी ऊर्जा कंपनियों और ओपीके ओबोर्नप्रोम, यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन जैसी हथियार निर्माता कंपनियों पर असर होगा.

इसके अलावा डोनेट्स्क, लुगांस्क और क्रीमिया के अधिकारियों की संपत्ति फ्रीज कर दी गई है और उनके ईयू में आने पर रोक लगा दी गई है. यह रोक शुक्रवार से लागू होगी.

डर यह भी है कि रूस यूरोप के कई देशों में गैस सप्लाई रोक भी सकता है या कम कर सकता है. ऐसे में कई देशों को ठंड के मौसम में भारी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है. पोलैंड की पीजीएनआईजी गैस यूटिलिटी कंपनी ने दावा किया है कि रूस के गासप्रोम से मिलने वाली गैस की आपूर्ति आधी कर दी गई है. बुधवार को कंपनी के बयान में कहा गया कि 45 फीसदी आपूर्ति कम हुई है. पोलैंड को जाने वाली यह गैस पाइपलाइन यूक्रेन और बेलारूस से होकर जाती है. कंपनी ने कहा कि वह नहीं जानती कि मुश्किल तकनीकी है या राजनीतिक.

विश्लेषकों का कहना है कि इसके जरिए मॉस्को यूरोपीय संघ और यूक्रेन के बीच तनाव को बढ़ा भी सकता है. बैंक ऑफ अमेरिका के मेरिल लिंच कहते हैं, "हमें लगता है कि गासप्रोम इस तरह से 16 सितंबर को यूक्रेन और ईयू के बीच होने वाली बातचीत से पहले अपना भाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. "

पोलैंड रूस की गैस पर निर्भर है. सालाना वह करीब 16 अरब क्यूबिक मीटर गैस इस्तेमाल करता है जिसका 60 फीसदी आयात किया जाता है. और इसमें से अधिकतर हिस्सा रूस से आता है.

शुक्रवार से शुरू होने वाली यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों की बैठक में संघ की आर्थिक स्थिति और नीति के बारे में चर्चा की जा रही है. सबसे बड़ी चुनौती है बजट में बिना कोई समझौता किए विकास की दर बढ़ाना कि कैसे नौकरियां बढ़े और बाजार में तेजी आए. अमेरिका और जापान तो 2008 की आर्थिक मंदी से उबर आए हैं लेकिन यूरोपीय संघ अभी तक धीमी गति से ही चल रहा है.

रिपोर्टः आभा मोंढे (रॉयटर्स, डीपीए, एएफपी)

संपादनः ईशा भाटिया

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