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दुनिया

रूस और भारत में रक्षा समझौता

रूस और भारत पांचवी पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट मिल कर बनाएंगे. इसके अलावा दोनों देशों के बीच भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने पर भी समझौता हुआ है. रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेद्वेदेव दिल्ली में हैं.

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मनमोहन से मिले मेद्वेदेव

रूसी राष्ट्रपति मेद्वेदेव की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान यह समझौते हुए हैं. समझा जाता है कि रूस भारत को अपने पाले में ही रखना चाहता है ताकि वह आगे भी रूस में बने हुए जेट और परमाणु संयंत्र खरीदे न कि बाकी पश्चिमी देशों से. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोजी के साथ भी भारत ने परमाणु करार किया है.

दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बातचीत के बाद जारी बयान में कहा गया है कि दोनों देश फाइटर्स के डिजाइन पर मिल कर काम करेंगे और तमिलनाडु में परमाणु ऊर्जा संयंत्र की तीसरी और चौथी यूनिट्स बनाएंगे. भारत की हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड कंपनी और रूस की सुखोई डिजाइन ब्यूरो मिल कर काम करेंगे

पूर्व सोवियत संघ के समय से भारत और रूस के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंध रहे हैं और भारत के रक्षा बाजार में रूस का बड़ा हिस्सा रहा है. लेकिन अब भारत एक देश पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहना चाहता. पिछले छह महीनों में ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस और चीन के नेताओं ने भारत का दौरा किया और भारत ने उनके साथ कुल 50 अरब डॉलर की साझेदारी की है.

बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ रूसी राष्ट्रपति भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बाचतीच कर रहे हैं. इसके बाद वह आगरा ताजमहल देखने जाएंगे और बुधवार को मुंबई की यात्रा करेंगे.

रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से लिखा है, "सभी जानते हैं कि हम रणनीतिक साझेदारी में अलग अलग देशों से संबंध बनाना चाहते हैं. हमारे रूस के साथ आगे भी नजदीकी संबंध बने रहेंगे लेकिन अब खेल में सिर्फ वहीं नहीं हैं."

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट की दावेदारी के लिए रूस से मौन सहमति की उम्मीद कर रहा है. फ्रांस और अमेरिका पहले ही भारत को अपनी सहमति दे चुके हैं. चीन ने हालांकि साफ शब्दों में नहीं कहा है कि वह भारत की दावेदारी का समर्थन करता है लेकिन उसने इसका विरोध भी नहीं किया है.

बताया जा रहा है कि भारत और रूस अगले दस साल में दो सौ से तीन सौ फाइटर जेट बनाएंगे और रूस भारतीय सेना को मिसाइल देगा. भारत की अकूत ऊर्जा मांग को पूरी करने के लिए रूस आगे भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने में भारत को मदद करना चाहता है. भारत के पूर्व विदेश सचिव ललित मानसिंह मानते हैं, "ऊर्जा के क्षेत्र में रूस भारत का सबसे अहम साझीदार है. पारंपरिक और नई, दोनों ही तरह की ऊर्जा में. हमारे परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का रूस मुख्य आपूर्तिकर्ता है."

भारत के साथ रूस का व्यापार इस साल 10 अरब यूरो का है जबकि 2010 के पहले दस महीनों में यूरोपीय संघ के साथ 246 अरब और और चीन के साथ 47.5 अरब का रहा. दोनों देशों को उम्मीद है कि आपसी कारोबार अगले पांच साल में 20 अरब का हो जाएगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम

संपादनः ए कुमार

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