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दुनिया

रूस और पश्चिम की लड़ाई में पिसता सीरिया

पश्चिमी देशों ने रूस पर सीरिया में युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया. दोनों तरफ से लगाये जा रहे आरोपों के बीच सीरिया में शांति के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.

फ्रांस और ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है. दोनों देशों के मुताबिक सीरियाई शहर अलेप्पो में हजारों नागरिक फंसे हुए हैं, यह जानते हुए भी रूसी और सीरियाई सेना वहां हवाई हमले कर रही है. यह युद्ध अपराध है.

रविवार को सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए अमेरिकी दूत सैमांथा पावर ने भी मॉस्को पर "बर्बरता" का आरोप लगाया. पावर ने कहा, "शांति का रास्ता चुनने के बजाए, रूस और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद युद्ध छेड़ रहे हैं." फ्रांस और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने भी मॉस्को पर सीधे तंज किये और कहा कि रूस युद्ध अपराध कर रहा है.

वहीं रूस के यूएन दूत विताली चुर्किन ने कहा कि उनका देश सीरिया के विभिन्न पक्षों के बीच संघर्षविराम और समझौता चाहता है, लेकिन फिलहाल, "शांति तक पहुंचना नामुमकिन लग रहा है." रूसी दूत ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने पक्ष के विद्रोहियों को नियंत्रित करने में नाकाम रहा है. इसके चलते अल कायदा से जुड़े आंतकवादी संगठनों को मदद मिल रही है.

(कैसे कैस बम बरस रहे हैं रूस में)

वहीं अलेप्पो निवासियों और विद्रोहियों का कहना है कि शहर पर हुए ताजा हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं. पिछले हफ्ते रूस और अमेरिका के बीच सीरिया को लेकर हुआ शांति समझौता टूट गया. तब से 20 लाख की आबादी वाले अलेप्पो की पानी की सप्लाई काट दी गई है.

संयुक्त राष्ट्र ने भी अलेप्पो में जारी तीखी लड़ाई पर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने हालात को "खौफनाक मंजर" करार देते हुए रूस और अमेरिका से मतभेद दूर कर शांति बहाल करने की अपील की है. बान की मून ने कहा, "मैं इसमें शामिल सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे इस खौफनाक मंजर को खत्म करने के लिए कड़ी मेहनत करें."

सीरिया में मार्च 2010 में राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए. अरब वंसत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन कुछ ही दिन के भीतर सशस्त्र संघर्ष में बदल गये और देश में गृह युद्ध छिड़ गया. सीरियाई राष्ट्रपति का आरोप है कि पश्चिम ने विद्रोहियों को हथियार दिये. पश्चिमी देश जुलाई 2000 से सत्ता में काबिज असद पर आम लोगों की आवाज को दबाने का आरोप लगाते हैं. करीब छह साल से चल रहे गृह युद्ध में अब तक 3,00,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. सीरिया के लाखों नागरिकों को विस्थापित होना पड़ा है. विस्थापितों की बड़ी संख्या लेबनान, तुर्क और यूरोप में शरण पाने की कोशिश कर रही है.

ओएसजे/एमजे (एएफपी, रॉयटर्स)

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