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दुनिया

रूस और नाटो में तनातनी

रूस ने कहा है कि वह नाटो के रैपिड रिस्पॉन्स टीम के जवाब में मजबूत सैन्य नीति अपनाएगा. नाटो यूक्रेन में रूस की कथित घुसपैठ को रोकने के लिए यह विशेष दल बनाना चाहता है.

मॉस्को की इस घोषणा के बाद एक बार फिर नाटो की दो दिवसीय शिखर वार्ता से पहले तनाव बढ़ गया है. गुरुवार को वेल्स में नाटो की बैठक होने वाली है. और इसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से सैन्य मदद की मांग करेंगे. नाटो प्रमुख आंदर्स फो रासमुसेन ने ब्रसेल्स में कहा कि 28 देशों वाला यह गठबंधन कई हजार सैनिकों वाले एक अतिरिक्त सैन्यबल का गठन करेगा. जिसे कुछ ही दिनों में तैनात किया जा सकेगा ताकि पूर्वी यूरोप में रूसी सेना की संभावित कार्रवाई का जवाब दिया जा सके. नाटो की इस योजना के जवाब में रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उपसचिव मिखाइल पोपोव ने पश्चिम की योजना को इस बात का सबूत बताया कि अमेरिका और नाटो नेता रूस के साथ तनाव बढ़ाने की अपनी नीति पर कायम रहना चाहते हैं.

पोपोव ने कहा कि रूस के 2010 के सैन्य सिद्धांत अपना ध्यान आने वाली नाटो शिखर वार्ता और उसके नए मिसाइल रोधी प्रणाली पर बढ़ाएंगी. इस दस्तावेज के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा होने की स्थिति में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की अनुमति है. उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि हमारी सीमा के पास नाटो सदस्यों की सैन्य संरचना, जिसमें नाटो का विस्तार भी शामिल है, वह रूस के लिए एक सैन्य खतरा बनी रहेगी."

सैन्य हल नहीं

यूक्रेन के राष्ट्रपति पोरोशेंको ने खुद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और रक्षा परिषद की बैठक सोमवार को बुलाई. जिससे पूर्वी यूक्रेन से सेना के पीछे हटने को रोका जा सके. लुगांस्क का हवाई अड्डा एक बार फिर रूस समर्थक अलगाववादियों ने अपने कब्जे में ले लिया है. पोरोशेंको ने दावा किया था कि 1000 रूसी सैनिक पूर्वी इलाके में आए हैं. नाटो का मानना है कि क्रेमलिन ने इन्हें यूक्रेनी सीमा में घुसाया है.

मॉस्को ने एक बार फिर पूर्वी यूक्रेन में सैनिक भेजने या तैनात करने की बात का खंडन किया है. लेकिन अलगाववादियों का नेतृत्व कर कमांडरों ने माना है कि कुछ रूसी सैनिक जो ड्यूटी पर नहीं हैं या छुट्टी पर हैं, वो अलगाववादियों के साथ आए हैं.

मॉस्को और पश्चिम के बीच बढ़ते तनाव को भांपते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने विवाद से जुड़े सभी धड़ों को चेतावनी दी है कि संकट का हल किसी सैन्य कार्रवाई से नहीं हो सकता. न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश आपस में गंभीरता से बात कर रहे हैं कि इस समस्या का हल कैसे निकले. लेकिन इस अहम ये है कि वो समझे कि इसके लिए कोई सैन्य हल नहीं है. इस संकट का हल राजनीतिक संवाद और उत्तर होना होना चाहिए, यह ज्यादा टिकाऊ होगा."

एएम/एजेए (एएफपी, रॉयटर्स)

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