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दुनिया

रूसी मदद से ईरान में पहला परमाणु संयंत्र शुरू

पश्चिमी देशों के कड़े विरोध के बावजूद ईरान अपना पहला परमाणु संयंत्र चालू करने जा रहा है. पहले परमाणु संयंत्र में ईंधन भरने का काम शुरू कर दिया गया है. ईंधन भरते समय सामने आए रूस और ईरान के अधिकारी.

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सरगेई किरीएंको और अली अकबर सलेही

ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल पर परमाणु संयंत्र में ईंधन भरने की कार्रवाई का सीधा प्रसारण किया गया. इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख अली अकबर सलेही रूसी अधिकारियों के साथ दिखाई दिए. रिएक्टर में फ्यूल रॉड डालने का फुटेज टीवी पर दिखाया गया.

परमाणु संयंत्र शुरू करने का एलान करते हुए सलेही ने कहा, ''पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और अड़चनों के बावजूद अब हम ईरान के सबसे बड़े शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के गवाह बन रहे हैं.'' चार दशकों बाद यह पहला मौका है जब ईरान का परमाणु कार्यक्रम शुरू हो रहा है.

रूस का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा. ईंधन को इस्तेमाल करने के बाद वापस रूस भेज दिया जाएगा. रूस का दावा है कि ऐसा करने से ईरान के पास ईंधन को संशोधित कर परमाणु बम बनाने का विकल्प नहीं रहेगा.

रूसी परमाणु सहयोग कार्यक्रम के प्रमुख सरगेई किरीएंको कहते हैं, ''बुशेहर के परमाणु संयंत्र को चालू करने से यह पता चलता है कि ईरान को आईएईए से बातचीत के रास्ते पर लाया जा सकता है. ईरान को भी शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु ऊर्जा पैदा करने का हक है.'' 1970 के दशक में रूस ने ईरान के बुशेहर में परमाणु संयंत्र लगाया था. तब जर्मन कंपनी सीमेंस ने इसे चालू भी कर दिया था. लेकिन ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद परमाणु संयंत्र बंद कर दिया गया. तभी से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लकीर भी खिंचती चली गई.

पश्चिमी देश आरोप लगाते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है. ईरान इससे इनकार करता है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम से नाराज होकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत कई देशों ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं. अब तक ईरान पर तीन चरणों में प्रतिबंध लगाए गए हैं. ईरान इन प्रतिबंधों से नाराज है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: वी कुमार

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