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खेल

रूसी फुटबॉल में सुपर लीग

फुटबॉल वर्ल्ड कप की 2018 में मेजबानी करने वाले रूस में बहुराष्ट्रीय सुपर लीग की महात्वाकांक्षी योजना बन रही है. कम से कम फुटबॉल के मैदान पर सोवियत संघ को जीवित करने का सपना. योजना के पीछे मुनाफा चाहने वाले कारोबारी हैं.

जेस्का मॉस्को बनाम डीनामो कीव और बाटे बोरीसोव बनाम जेनिट सेंट पीटर्सबर्ग. जल्द ही पुराने सोवियत संघ की महक पूर्वी यूरोप के फुटबॉल को रोमांचित करेगी. रूस और यूक्रेन के प्रमुख क्लबों के प्रतिनिधि एक साझा सुपर लीग के साथ यूरोपीय फुटबॉल की प्रमुख टीमों को चुनौती देना चाहते हैं. रूस की प्रीमियर लीग की टीम अलानिया व्लादीकावकास के अध्यक्ष वलेरी गसायेव कहते हैं, "यह यूरोप की सबसे मजबूत प्रतियोगिताओं में होगा, इसलिए हर खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में खेलना चाहेगा."

रूस की राष्ट्रीय टीम के कोच रहे गसायेव नई सुपरलीग की तैयारी के लिए बने वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष हैं. उनकी अपनी टीम अलानिया इस समय तालिका में काफी नीचे है, इसलिए लीग में भाग लेने के मौके कम हैं, लेकिन यह प्रीमियर लीग में दबदबे वाली टीमों की प्रतिस्पर्धी होगी. सुपर लीग की योजना को आगे बढ़ाने वालों में चैंपियन सेंट पीटर्सबर्ग, मॉस्को का पुराना सेना क्लब जीस्का और कॉकेशिया का नया नया अमीर बना क्लब आंशी मखाचकाला शामिल हैं.

इन रूसी क्लबों के अलावा यूक्रेन के टॉप क्लब भी सुपर लीग की योजना का समर्थन कर रहे हैं. उनमें शाख्तयोर डोनेत्स्क और डीनामो कीव शामिल हैं. बेलारूस से लगातार चैंपियन बनने वाले क्लब बाटे बोरीसोव ने भी दिलचस्पी दिखाई है. सुपरलीग में इन क्लबों की दिलचस्पी के पीछे एक वजह यह है कि उनकी दिलचस्पी छोटे क्लबों के खिलाफ खेलने में नहीं है, जहां खस्ताहाल स्टेडियमों में दर्शकों की तादाद भी कम होती है. फुटबॉल सुपर लीग के समर्थक हॉकी लीग केएचएल का उदाहरण दे सकते हैं, जो पूर्व यूरोप का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट बन गया है.

अगर सुपर लीग शुरू होता है तो उससे लाभ उठाने वालों में  रिनाट अखमेतोव और सुलेमान करीमोव जैसे नए रईस भी शामिल हैं जो शाख्तयोर और आंशी के मालिक हैं. उन्हें दर्शक बढ़ने से और टीवी लाइसेंस से और ज्यादा कमाई की उम्मीद है. जेनिट, आंशी और दूसरे क्लब पश्चिमी यूरोप की बड़ी टीमों बार्सिलोना, मैनचेस्टर यूनाइटेड या पैरिस सेंट जरमां क खिलाफ प्रतिस्पर्धा के लिए चुस्त होना चाहते हैं. इस समय पूर्वी यूरोप की टीमें पश्चिमी क्लबों का मुकाबला करने की हालत में नहीं हैं. चैंपियंस लीग में रूस का चैंपियन जेनिट और पुराना क्लब स्पार्टाक मॉस्को आरंभिक दौर में ही बाहर हो गए.

इस समय सुपरलीग के ढांचे पर सौदेबाजी हो रही है. सवाल यह है कि कौन देश कितनी टीमें भेजेगा. लीग में जगह पाने के नियम क्या होंगे. सुपरलीग के ढांचे पर जो भी फैसला हो, अंतिम फैसला यूरोपय फुटबॉल संघ ऊएफा का होगा.

एमजे/एजेए (डीपीए)

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