1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

रूमानी फिल्मों के लिए याद रहेंगे यश चोपड़ा

बॉलीवुड में यश चोपड़ा को एक ऐसे फिल्मकार के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने रूमानी फिल्मों के जरिए दर्शको के बीच अपनी खास पहचान बनायी. आज ही के दिन 1932 में उनका पंजाब के लाहौर में जन्म हुआ.

यश चोपड़ा के बड़े भाई बीआर चोपड़ा फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने निर्माता निर्देशक थे. अपने करियर के शुरूआती दौर में यश चोपड़ा ने आइएस जौहर के साथ बतौर सहायक काम किया. बतौर निर्देशक उन्होंने अपने सिने करियर की शुरूआत 1959 में अपने भाई के बैनर तले बनी फिल्म 'धूल का फूल' से की.

1961 में यश चोपड़ा को एक बार फिर से अपने भाई के बैनर तले बनी फिल्म 'धर्म पुत्र' को निर्देशित करने का मौका मिला. इस फिल्म से ही अभिनेता शशि कपूर ने अपने सिने करियर की शुरूआत की थी. 1965 में प्रदर्शित फिल्म 'वक्त' यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी उत्कृष्ट फिल्मों में शुमार की जाती है. इस फिल्म को बॉलीवुड की पहली मल्टीस्टारर फिल्म माना जाता है. वक्त में बलराज साहनी, राजकुमार, सुनील दत्त, शशि कपूर और रहमान ने मुख्य भूमिकाएं निभायी थी.

1969 में यश चोपड़ा के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म 'इत्तेफाक' रिलीज हुई. दिलचस्प बात है कि राजेश खन्ना और नंदा की जोड़ी वाली इस संस्पेंस थ्रिलर में कोई गीत नहीं था. इसके बावजूद फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया और उसे सुपरहिट बना दिया.

Veer Zara, ein Film des Bollywood- Regisseurs Yash Chopra

चोपड़ा की लोकप्रिय फिल्म वीर जारा

1973 में फिल्म 'दाग' के जरिए यश चोपड़ा ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और यश राज बैनर की स्थापना की. राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और राखी अभिनीत यह फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई. 1975 में फिल्म 'दीवार' उनके सिने करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई.

कभी कभी से सिलसिला तक

1976 में यश चोपड़ा की फिल्म 'कभी कभी' रिलीज हुई. रूमानी पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में उन्होंने एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन से रूमानी किरदार करवाकर दर्शकों को अंचभित कर दिया. माना जाता है कि यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन के जरिए गीतकार साहिर लुधियानवी की जिंदगी से जुड़े पहलुओं को रूपहले पर्दे पर पेश किया था. इसके बाद 1981 में प्रदर्शित फिल्म 'सिलसिला' उनके निर्देशन में बनी महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है. माना जाता है कि इस फिल्म में अमिताभ और रेखा के जीवन को रूपहले पर्दे पर दर्शाया गया है.

1982 से 1989 तक का वक्त यश चोपड़ा के सिने करियर के लिए बुरा साबित हुआ. इस दौरान उनकी 'नाखुदा', 'सवाल', 'फासले', 'मशाल', 'विजय' जैसी कई फिल्में बॉक्स आफिस पर असफल रहीं. फिर 1989 में श्रीदेवी और ऋषि कपूर अभिनीत फिल्म 'चांदनी' की कामयाबी के साथ यश चोपड़ा एक बार फिर से शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचे.

1991 में फिल्म 'लम्हे' भी लोगों के दिलों पर छा गयी. इस फिल्म के जरिए इन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती है. समीक्षकों का मानना है कि यह फिल्म यश चोपड़ा के करियर की उत्कृष्ट फिल्मों में एक है. अपनी इन रूमानी फिल्मों के लिए यश चोपड़ा को हमेशा याद किया जाएगा.

आईबी/एमजे (वार्ता)

DW.COM

संबंधित सामग्री