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दुनिया

रिश्तेदारों में यौन संबंध पर रोक पर बहस

जर्मनी में निकट संबंधियों के बीच यौन संपर्क को अपराध संहिता से हटाने पर बहस छिड़ गई है. देश की नैतिकता परिषद ने इसके लिए सजा न देने की मांग की है. जर्मनी उन देशों में है करीबी रिश्तेदारों के बीच यौन संपर्क अपराध है.

दुनिया के बहुत से देशों में परिवार के अंदर सेक्स सामाजिक वर्जना है. जर्मनी जैसे बहुत से देशों में इसके लिए सजा भी दी जाती है. जर्मनी की नैतिकता परिषद ने एक दस्तावेज में कहा है कि अपराध कानून सामाजिक वर्जना को जारी रखने का उचित साधन नहीं है. यह दस्तावेज नैतिकता परिषद में बहुमत से पास किया गया है. यह परिषद समाज में नैतिक रूप से विवादास्पद मुद्दों पर सरकार और संसद को परामर्श देती है.

जर्मन नैतिकता परिषद का कहना है, "दंड संहिता का यह काम नहीं है कि वह वयस्क नागरिकों के बीच यौन संबंधों के लिए नैतिक मानक तय करे या उसकी सीमा तय करे." इसलिए नैतिकता परिषद ने सरकार से जर्मन दंड संहिता के इस संबंधी पाराग्राफ को रद्द करने की अपील की है. नैतिकता परिषद के फैसले के बाद जर्मनी में इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है. कंजरवेटिव राजनीतिज्ञ बच्चों के लिए सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

चांसलर अंगेला मैर्केल की सीडीयूयसीएसयू संसदीय पार्टी की कानून प्रवक्ता एलिजाबेथ विंकेलमायरयबेकर ने कहा, "दंड संहिता की धारा 173 को खत्म करना जो निकट रिश्तेदारों के बीच संभोग को अपराध बताता है या भाई बहनों के बीच समागम के लिए सजा को समाप्त करना गलत संकेत होगा." उनका कहना है कि यह बच्चों के अबाध विकास के खिलाफ होगा.

जेनेटिक नुकसान का खतरा

इस मुद्दे पर जर्मन नैतिकता परिषद के फैसले की वजह 2012 में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का एक फैसला है. अपनी बहन के साथ चार बच्चे पैदा करने वाले जर्मन शहर लाइपजिग के एक व्यक्ति ने जर्मन कानून के खिलाफ सर्वोच्च मानवाधिकार अदालत में अपील की थी. यूरोपीय अदालत ने निकट रिश्तेदारों के बीच यौन संबंधों के लिए सजा वाले जर्मन संवैधानिक न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया था.

करीबी रिश्तेदारों के बीच सेक्स को यूं तो पूरी दुनिया में गलत समझा जाता है, लेकिन जर्मनी जैसे देशों में इस पर प्रतिबंध है और इसके लिए सजा का प्रावधान है. इसके लिए एक तो जेनेटिक नुकसान के खतरे की दलील दी जाती है दूसरी ओर यह समझा जाता है कि इससे जर्मन संविधान में तय परिवारों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है. जर्मन दंड संहिता की धारा 173 भाई बहनों और सौतेले भाई बहनों के अलावा मां-बाप, दादा-दादी और बच्चों के बीच सेक्स पर प्रतिबंध लगाती है. इसका उल्लंघन करने वाले वयस्कों को तीन साल तक की सजा दी जा सकती है.

संलैंगिक संबंधों के लिए सजा

22 देशों के अंतरराष्ट्रीय अपराध कानूनों का अध्ययन करने के बाद माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट का कहना है कि करीबी रिश्तेदारों के बीच सेक्स के लिए हर कहीं सजा नहीं दी जाती. फ्रांस, नीदरलैंड्स, तुर्की, रूस और चीन जैसे देशों में इस पर प्रतिबंध भी नहीं है, लेकिन इन सब देशों में निकट संबंधियों के बीच विवाह पर रोक है. जर्मनी की तरह ऑस्ट्रेलिया, चिली, यूरोप के कई देशों और अमेरिका के कई प्रांतों पर इसे अपराध की कोटि में रखा गया है. जर्मनी में महिलाओं और पुरुष संबंधियों के बीच सेक्स वर्जित है तो दूसरे कई देशों में संलैंगिक संबंधों और दूसरे सेक्स संबंधों के लिए भी सजा का प्रावधान है.

जर्मन नैतिकता परिषद की रिपोर्ट के अनुसार रिश्तेदारों के बीच सेक्स पर रोक के लिए जेनेटिक खतरे की दलील काफी नहीं है. उसका कहना है कि जेनेटिक समस्या वाले दूसरे जोड़ों पर भी सेक्स के लिए कोई रोक नहीं है. इस मामले में सिर्फ करीबी रिश्तेदारों के बीच एकमत से बनाए गए सेक्स संबंधों की बात है, जर्मनी में जबरदस्ती सेक्स वाले मामले यौन दुर्व्यवहार वाली धारा के अंतर्गत आते हैं और उसके लिए धारा 173 के बिना भी सजा का प्रावधान है.

एमजे/आईबी (डीपीए, ईपीडी)

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