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दुनिया

रिटायर्ड पोप बेनेडिक्ट ने वायदा निभाया

चार साल पहले ईश्वरीय ओहदे से अचानक उनके इस्तीफे ने हलचल मचा दी थी और पोप फ्रांसिस क्रांति का सूत्रपात हुआ. अपने उत्तराधिकारी के कामों में हस्तक्षेप न करने का वायदा उन्होंने अभी तक पूरी तरह निभाया है.

रविवार को 90 साल के हो रहे रिटायर्ड पोप बेनेडिक्ट सोलहवें कैथोलिक गिरजे के अकेले प्रमुख हैं जिन्होंने मृत्युपर्यंत काम करने के बदले रिटायरमेंट का रास्ता अपनाया है. बेनेडिक्ट का जन्मदिन ईस्टर रविवार को पड़ता है, जो ईसाईयों के लिए खास दिन है. इसी दिन यीशु का पुनर्जन्म मनाया जाता है.

पोप के बड़े भाई 93 साल के गियॉर्ग कहते हैं कि यह जश्न मनाने का मौका है. सोमवार को एक पार्टी का आयोजन किया जा रहा है जिसमें रिटायर्ड पोप के अलावा गियॉर्ग, कुछ करीब दोस्त और उनके गृह प्रांत बवेरिया से एक छोटा सा प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे.

गियॉर्ग खुद बवेरिया में रहते हैं लेकिन भाई से मिलने नियमित रूप से वैटिकन जाते हैं और उनसे रोज टेलिफोन पर बातचीत करते हैं. आम जर्मनों की तरह गियॉर्ग की अपने भाई के लिए एक ही प्रार्थना है कि, "भगवान उन्हें कुछ और साल दें, और शाश्वत जिंदगी में प्रवेश से पहले उन्हें तकलीफ से मुक्ति मिली रहे."

Papst Benedikt mit Bruder Georg Ratzinger (picture-alliance/dpa/Vatican Pool)

बेनेडिक्ट और गियॉर्ग

चार साल पहले इस्तीफा देने के बाद से बेनेडिक्ट ने वैटिकन गार्डंस के अंदर प्रार्थना की शांत जिंदगी बितायी है और बहुत कम मौकों पर बाहर निकले हैं. उनके सहयोगियों का कहना है कि वे लगातार कमजोर होते जा रहे हैं, लेकिन अभी भी बौद्धिक रूप से सजग हैं. जर्मन कार्डिनल गेरहार्ड लुडविष मुलर कहते हैं, "जाहिर है कि वे 18 साल के नहीं हैं, लेकिन दिमाग से बहुत ही स्पष्ट हैं. सोचना, पढ़ना, सब कुछ पहले की तरह जारी है."

उनके प्राइवेट सेक्रेटरी आर्कबिशप गियॉर्ग गेंसवाइन ने इस हफ्ते दैनिक 'ला रिपब्लिका' को बताया कि वे एक फ्रेम की मदद से चलते हैं और पियानो बजाना कम कर दिया है, क्योंकि उनका कहना है कि उनकी अंगुलियां अब पहले की तरह नहीं चलती. बवेरिया के छोटे से शहर मार्क्टल अम इन में पैदा हुए जोसेफ रात्सिंगर 1951 में पादरी बने. दो साल बाद उन्होंने धर्मशास्त्र में डॉक्टरेट ली. 1977 में वे कार्डिनल बने और 1981 से 2005 तक डॉक्ट्रीन ऑफ फेथ के प्रमुख रहे.

पोप के रूप में उनका कार्यकाल आसान नहीं रहा. यह समय पादरियों के ऊपर पीडोफिल कांड का साया रहा. वैटिकन में विवादों की खबर रही, 2006 में इस्लाम पर उनके एक भाषण को गलत समझा गया और विद्रोही कैथोलिकों के साथ सहयोग की उनकी कोशिशों का यहूदियों ने विरोध किया. बुद्धिजीवी के रूप में सम्मानित बेनेडिक्ट में अपने पूर्वगामी पोप पॉल द्वितीय या पोप फ्रांसिस की तरह करिश्मे का अभाव दिखा. अपने हार्डलाइन कंजर्वेटिज्म के चलते उन्हें पांसरकार्डिनाल कहा जाता था.

वैटिकन में दो पोप वाली स्थिति कई मुद्दों पर पोप फ्रांसिस के आधुनिक रुख के बावजूद इसलिए आसान रही है कि बेनेडिक्ट ने सारे दबावों को नजरअंदाज करते हुए अपने उत्तराधिकारी पर बहस में फंसने से इंकार कर दिया है. गेंसवाइन कहते हैं, "उन्होंने चुप रहने और अपने निर्णय के प्रति ईमानदार रहने का फैसला किया है."

एमजे/आरपी (डीपीए)

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